हरियाणा में धान खरीद पर सख्त निगरानी, फर्जीवाड़े की आशंका
हरियाणा में धान की सरकारी खरीद में सतर्कता
हरियाणा में धान की खरीद: हरियाणा में धान की सरकारी खरीद के दौरान संभावित गड़बड़ियों को लेकर सरकार और जिला प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। यह संदेह है कि कुछ किसान और अन्य लोग बासमती धान की खेती करने के बावजूद 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर गैर-बासमती धान का पंजीकरण कराकर सरकारी खरीद का गलत लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। इस प्रकार की गड़बड़ी की आशंका के चलते मंडियों में धान की आवक, फसल के पंजीकरण और खरीद प्रक्रिया की निगरानी को सख्त किया गया है।
हरियाणा में खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के दौरान धान की सरकारी खरीद 29 सितंबर से शुरू हुई थी। राज्य सरकार ने पहले से ही फसल सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड के मिलान पर जोर दिया है, ताकि दूसरे राज्यों से धान लाकर सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने और फसल की गलत जानकारी दर्ज कराने जैसी संभावित अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
गैर-बासमती धान के पंजीकरण पर संदेह
मंडियों और खरीद केंद्रों में कुछ मामलों में गैर-बासमती धान की आवक और नीलामी को लेकर गड़बड़ी की आशंका जताई गई है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि पोर्टल पर दर्ज फसल और किसान के खेत में वास्तव में बोई गई फसल का मिलान किया जाए। यदि बासमती की खेती के बावजूद गैर-बासमती धान का पंजीकरण कराया गया है, तो इससे सरकारी खरीद व्यवस्था में गलत दावे और वित्तीय नुकसान का जोखिम उत्पन्न हो सकता है।
गेट पास और CCTV रिकॉर्ड की होगी जांच
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निर्देशों के अनुसार, जिला खाद्य एवं पूर्ति नियंत्रकों को धान खरीद पर बारीकी से नजर रखने और आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। मार्केट कमेटियों के सचिवों को मंडियों में पहुंचने वाली फसल की निगरानी करने और किसान के वास्तविक फसल विवरण के आधार पर प्रवेश गेट पास जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। मंडी के प्रवेश और निकासी द्वारों पर लगे CCTV कैमरों को सही स्थिति में रखने और खरीद अवधि की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। निर्देशों में कहा गया है कि यदि फर्जी आवक दर्ज होने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
करनाल में भी संदिग्ध मामले सामने आए
धान खरीद को लेकर करनाल जिले में भी जांच चल रही है। यमुना में डूबी जमीन पर धान की फसल का पंजीकरण दर्ज होने के मामले की जांच शुरू की गई है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश से धान लाकर हरियाणा की मंडियों में बेचने के आरोपों को लेकर घरौंडा और इंद्री में दो FIR दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। सरकार की निगरानी बढ़ाने का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और वास्तविक किसानों के हितों की रक्षा करना है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सत्यापन और खरीद के दौरान अनियमितताओं पर कार्रवाई हो, लेकिन किसानों को अपनी उपज बेचने में अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
