ईपीएफ निकासी: भविष्य की वित्तीय सुरक्षा पर प्रभाव
ईपीएफ निकासी का प्रभाव
कई लोग अचानक आने वाले खर्चों को पूरा करने के लिए अपने ईपीएफ खाते से पैसे निकाल लेते हैं। यह निर्णय उस समय आसान और आवश्यक लग सकता है, लेकिन इसका भविष्य की वित्तीय सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि ईपीएफ केवल बचत का साधन नहीं है, बल्कि यह रिटायरमेंट फंड बनाने का एक मजबूत माध्यम भी है। इसमें मिलने वाला ब्याज और उस पर मिलने वाला अतिरिक्त ब्याज समय के साथ धन को तेजी से बढ़ाता है। इसलिए, समय से पहले निकासी भविष्य के बड़े फंड को कमजोर कर सकती है।
चक्रवृद्धि का महत्व
ईपीएफ में जमा धन पर हर साल ब्याज मिलता है, और यह ब्याज अगले वर्षों में भी कमाई करने लगता है। इसे चक्रवृद्धि या कंपाउंडिंग कहा जाता है। शुरुआत में वृद्धि सामान्य लगती है, लेकिन समय के साथ रिटर्न की गति बढ़ती जाती है। यही कारण है कि लंबे समय तक निवेश करने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय बड़ा फंड मिलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपाउंडिंग का लाभ तभी मिलता है जब निवेश को बिना छेड़े लंबे समय तक बढ़ने दिया जाए। बीच में निकासी करने से यह प्रक्रिया बाधित होती है और भविष्य का संभावित रिटर्न कम हो जाता है।
1 लाख रुपये की निकासी का प्रभाव
फिनटेक प्लेटफॉर्म कस्टोडियन लाइफ के संस्थापक कुणाल काबरा के अनुसार, कम उम्र में की गई ईपीएफ निकासी रिटायरमेंट फंड पर स्थायी प्रभाव डाल सकती है। उनका कहना है कि यदि कोई कर्मचारी 28 वर्ष की उम्र में अपने ईपीएफ खाते से 1 लाख रुपये निकालता है, तो रिटायरमेंट तक पहुंचते-पहुंचते उसे लगभग 11.78 लाख रुपये का संभावित नुकसान हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि निकाली गई राशि आने वाले कई दशकों तक कंपाउंडिंग का लाभ नहीं ले पाती। जितनी जल्दी निकासी होगी, उसका असर उतना ही अधिक दिखाई देगा।
उदाहरण से समझें गणित
काबरा ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि यदि कोई कर्मचारी 23 वर्ष की उम्र से ईपीएफ में निवेश शुरू करता है और 58 वर्ष तक योगदान जारी रखता है, तो लंबी अवधि में बड़ी पूंजी तैयार हो सकती है। मान लें कि पहले 10 वर्षों तक हर महीने 5,000 रुपये, अगले 10 वर्षों तक 10,000 रुपये, फिर 10 वर्षों तक 20,000 रुपये और अंतिम 5 वर्षों तक 25,000 रुपये का योगदान किया जाए। मौजूदा 8.25 प्रतिशत ब्याज दर के आधार पर रिटायरमेंट के समय यह फंड लगभग 2.11 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। लेकिन बीच में निकासी करने पर यही लक्ष्य कमजोर पड़ जाता है।
ईपीएफ को आपातकालीन बचत न समझें
विशेषज्ञों का मानना है कि ईपीएफ खाते को सामान्य बचत खाते की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यह रिटायरमेंट सुरक्षा के लिए बनाया गया निवेश साधन है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति 28 साल की उम्र में 5 लाख रुपये निकाल लेता है, तो रिटायरमेंट तक उसका संभावित नुकसान करीब 60 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। इसलिए, केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही निकासी पर विचार करना चाहिए। वित्तीय अनुशासन और लंबे समय तक निवेश बनाए रखना ही ईपीएफ से अधिकतम लाभ लेने का सबसे प्रभावी तरीका है।
