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ब्रिक्स देशों के बीच डिजिटल व्यापार और स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों से आग्रह किया है कि वे अपनी भुगतान प्रणालियों को एकीकृत करें और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दें। उन्होंने डिजिटल व्यापार को वैश्विक स्तर पर सुलभ बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। गोयल ने व्यापारियों के लिए बाजार तक पहुंच को सरल बनाने और कृषि-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने का भी सुझाव दिया। इस सम्मेलन में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच व्यापार सहयोग को मजबूत करने के लिए कई पहल की गई हैं।
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ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026 में पीयूष गोयल का संबोधन

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों से आग्रह किया कि वे अपनी भुगतान प्रणालियों को एकीकृत करें, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को प्रोत्साहित करें और वैश्विक डिजिटल व्यापार को अधिक सुलभ बनाएं। ‘ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026’ के उद्घाटन सत्र में उन्होंने बताया कि भारत ने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भारत का यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) अब सालाना 250 अरब से अधिक लेनदेन का आंकड़ा पार कर चुका है, जो वैश्विक स्तर पर लेनदेन की संख्या में आधे से अधिक है।


गोयल ने कहा, ‘‘आज यूपीआई को 11 देशों में स्वीकार किया जाता है। मैं ब्रिक्स के सदस्यों और साझेदार देशों से अनुरोध करता हूं कि वे हमारी भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ें, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करें और डिजिटल व्यापार को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दें।’’ यह ‘बिजनेस फोरम’ दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित किया गया है, जिसमें भारत शनिवार से मेज़बानी कर रहा है। यह सम्मेलन वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच हो रहा है, जो रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-ईरान संघर्ष से उत्पन्न हुई हैं।


उन्होंने यह भी कहा कि साझेदार देशों के बीच व्यापार को गहरा और मजबूत बनाना चाहिए और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लानी चाहिए, ताकि किसी भी देश की वृद्धि और कल्याण में बाधा न आए। गोयल ने कहा, ‘‘हमें कच्चे माल और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अपने बाजार खोलने चाहिए। हमारी आपूर्ति श्रृंखलाएं तभी मजबूत होंगी जब वे दोनों दिशाओं में कार्य करेंगी।’’


मंत्री ने व्यापारियों के लिए बाजार तक पहुंच को सरल बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं ब्रिक्स के सदस्यों और साझेदार देशों से अनुरोध करता हूं कि वे अपने बाजार खोलें और नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने में सहयोग करें।’’ इसके अलावा, उन्होंने खाद्य सुरक्षा के हित में ब्रिक्स देशों के किसानों के लिए कृषि-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने का भी सुझाव दिया।


गोयल ने कहा, ‘‘आइए, हम एक-दूसरे के लिए अपने सेवा बाजार खोलें। पेशेवरों को सीमाओं के पार आसानी से आने-जाने दें और एक-दूसरे की पेशेवर योग्यताओं को मान्यता देना आसान बनाएं।’’ उन्होंने कृषि, दवा, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन और सेवाओं के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाओं की बात की।


सत्र में रूस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव ने कहा कि ब्रिक्स देश वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं और सतत भविष्य के लिए एक मजबूत आवाज हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ावा देने और हरित तथा डिजिटल बदलाव को तेज करने के लिए ठोस कदम उठाने के पक्ष में हैं।’’


रेशेतनिकोव ने ब्रिक्स के सदस्यों से ‘ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज’ और ‘ब्रिक्स विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) संघ’ पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश दुनिया के प्रमुख उत्पादकों और उपभोक्ताओं में शामिल हैं, लेकिन वे अब भी ऐसे मूल्य मानकों पर निर्भर हैं जो अलग-अलग बाजारों के हितों को दर्शाते हैं।


उन्होंने कहा कि रूस ने ‘ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज’ स्थापित करने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की है, जो एक एकीकृत व्यापार मंच होगा। यहां उत्पादक, कारोबारी और खरीदार सीधे लेनदेन कर सकेंगे।


वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने व्यापार वित्त की कमी को दूर करने के लिए कदम उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक व्यापार वित्त में 2.5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की कमी का अनुमान है। हमें निर्यातकों को पुष्ट आदेशों और भरोसेमंद भुगतान रिकॉर्ड के आधार पर किफायती कार्यशील पूंजी हासिल करने में सक्षम बनाना चाहिए।’’


अग्रवाल ने कहा कि ब्रिक्स मंत्रियों ने वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए कई क्षेत्रों में अधिक सहयोग का संकल्प लिया है। ब्रिक्स में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। 2024 में इसमें नए सदस्य शामिल होंगे, जबकि पिछले साल कई अन्य देशों को ब्रिक्स के साझेदार देश के रूप में जोड़ा गया है।


ब्रिक्स एक प्रभावशाली समूह के रूप में उभरा है, जिसमें दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जो वैश्विक आबादी के करीब 49.5 प्रतिशत, वैश्विक जीडीपी के करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के करीब 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करती हैं।