भारत में डेटा सेंध की लागत 2026 में बढ़कर 25.5 करोड़ रुपये तक पहुंची
भारत में डेटा सेंध की औसत लागत में वृद्धि
मुंबई, तीन अगस्त: भारत में किसी संगठन के लिए डेटा या सूचनाओं में सेंध लगाने की औसत लागत वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 25.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है, जब यह आंकड़ा 22 करोड़ रुपये था। यह जानकारी सोमवार को एक रिपोर्ट में साझा की गई।
आईबीएम द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में डेटा सेंध का दायरा भी बढ़ा है। वर्ष 2026 में औसतन 39,500 रिकॉर्ड प्रभावित हुए, जबकि 2025 में यह संख्या 38,200 थी। आईबीएम ने कहा कि 25.5 करोड़ रुपये की यह औसत लागत अब तक की सबसे अधिक है।
आईबीएम इंडिया एवं दक्षिण एशिया के प्रौद्योगिकी उपाध्यक्ष गौरव अग्रवाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से अपनाने के कारण साइबर खतरों में भी तेजी से विकास हो रहा है। उन्होंने कहा, 'एजेंटिक क्षमताओं वाले एआई को सुरक्षा के पूरे जीवनचक्र में शामिल किया जाना चाहिए, जिसमें खतरे का पता लगाना, उसका विश्लेषण करना, प्राथमिकता तय करना और समाधान करना शामिल है।' यह रणनीति कारोबार क्षेत्रों के लिए मजबूती विकसित करने और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ हासिल करने में सहायक होनी चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, जिन संगठनों ने अपनी सुरक्षा प्रणाली में एआई और स्वचालन का उपयोग नहीं किया, उन्हें प्रति डेटा सेंध की औसतन 31.6 करोड़ रुपये की लागत उठानी पड़ी। वहीं, जिन संगठनों ने एआई और स्वचालन का व्यापक उपयोग किया, उनके लिए यह लागत 21.3 करोड़ रुपये रही। सीमित स्तर पर इसका उपयोग करने वाले संगठनों में यह लागत 23.1 करोड़ रुपये दर्ज की गई।
