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भारत: वैश्विक क्षमता केंद्रों का प्रमुख केंद्र बनता हुआ

भारत अब केवल सस्ती सेवाएं प्रदान करने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक कंपनियों के लिए नवाचार और तकनीकी विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के अनुसार, भारत में वैश्विक क्षमता केंद्रों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जानें कैसे ये केंद्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद में योगदान दे रहे हैं और भविष्य में क्या संभावनाएं हैं।
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भारत का नवाचार और तकनीकी विकास

भारत अब केवल सस्ती सेवाएं प्रदान करने वाला देश नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक कंपनियों के लिए नवाचार, अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीक का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। इस बदलाव का मुख्य कारण यह है कि बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां लगातार भारत में अपने वैश्विक क्षमता केंद्र स्थापित कर रही हैं। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने इस बात की पुष्टि की है कि भारत अब इस क्षेत्र में दुनिया के सबसे मजबूत देशों में से एक बन चुका है और एआई से संबंधित कौशल में भी तेजी से प्रगति कर रहा है.


वैश्विक क्षमता केंद्रों की स्थिति

हाल ही में भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित वैश्विक क्षमता केंद्र व्यापार सम्मेलन में वी. अनंत नागेश्वरन ने बताया कि भारत वर्तमान में दुनिया के लगभग आधे वैश्विक क्षमता केंद्रों का मेज़बान है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी अन्य देश में इतनी बड़ी संख्या में ऐसे केंद्र नहीं हैं.


वैश्विक क्षमता केंद्रों की भूमिका

वैश्विक क्षमता केंद्र किसी मल्टीनेशनल कंपनी की ऐसी इकाई होती है, जहां से कंपनी अपने तकनीकी कार्य, अनुसंधान, विश्लेषण, डिजिटल सेवाएं, साझा कारोबारी प्रक्रियाएं और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों का संचालन करती है। पहले ये कार्य बाहरी कंपनियों के माध्यम से किए जाते थे, लेकिन अब बड़ी कंपनियां इन्हें अपने केंद्रों के जरिए संचालित कर रही हैं.


भारत में वैश्विक क्षमता केंद्रों की वृद्धि

वी. अनंत नागेश्वरन ने बताया कि लगभग दो दशक पहले भारत में ऐसे केंद्रों की संख्या बहुत कम थी और इन्हें मुख्य रूप से बैक ऑफिस के रूप में देखा जाता था। अब इनकी संख्या बढ़कर दो हजार से अधिक हो गई है, जिसमें 20 लाख से ज्यादा पेशेवर कार्यरत हैं, और यह संख्या जल्द ही 23 लाख तक पहुंचने की संभावना है.


आर्थिक योगदान और भविष्य की संभावनाएं

इन वैश्विक क्षमता केंद्रों से होने वाला वार्षिक कारोबार 60 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, और इसके 100 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। इन केंद्रों का योगदान अब भारत के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग दो प्रतिशत है। इसके अलावा, देश के प्रमुख शहरों में नए कार्यालय परिसरों का एक बड़ा हिस्सा इन केंद्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है.


विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक क्षमता केंद्र

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि भारत में स्थापित वैश्विक क्षमता केंद्र अब केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। मुंबई और बेंगलुरु में वैश्विक बैंक अपने जोखिम प्रबंधन और कारोबार से जुड़े डिजिटल प्लेटफार्मों का संचालन कर रहे हैं। चेन्नई और पुणे में वाहन निर्माता कंपनियां नए वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों का विकास कर रही हैं।


जर्मनी की कंपनी मर्क का उदाहरण

उन्होंने जर्मनी की विज्ञान और प्रौद्योगिकी कंपनी मर्क का उदाहरण देते हुए बताया कि कंपनी ने हाल ही में बेंगलुरु में एक एकीकृत परिसर स्थापित किया है, जिसमें लगभग 3,300 विशेषज्ञ आंकड़ा विज्ञान, एआई और उद्यम टेक्नोलॉजी से जुड़े कार्य कर रहे हैं। यह परिसर मर्क का दुनिया में सबसे बड़ा डिजिटल क्षमता केंद्र बन गया है.


एआई और मशीन लर्निंग में भारत की भूमिका

वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि भारत में 1,200 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र अब एआई और मशीन लर्निंग से जुड़े कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। भारत अब उद्यम आधारित एआई प्रतिभा का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है.


भविष्य की दिशा

उन्होंने यह भी कहा कि एआई अपने आप विकसित या नियंत्रित नहीं होती है। इसके लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है जो इन प्रणालियों को तैयार करें और उनका परीक्षण करें। उनका कहना था कि भारत को केवल नई तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं बनना चाहिए, बल्कि तकनीकों के विकास में भी अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए.