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AI हेलुसिनेशन: साइबर सुरक्षा के लिए नया खतरा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की 'हेलुसिनेशन' समस्या अब एक गंभीर साइबर खतरा बन गई है। हैकर्स इस कमजोरी का फायदा उठाकर 'AI स्क्वैटिंग' के जरिए लोगों को ठग रहे हैं। वे पहले से अनुमान लगाते हैं कि AI कौन सी गलत वेबसाइटों का नाम ले सकता है और उन नामों को खरीद लेते हैं। जब उपयोगकर्ता AI के कहने पर उन लिंक्स पर क्लिक करते हैं, तो वे धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं। इस लेख में हम इस खतरे के बारे में विस्तार से जानेंगे और सुरक्षा के उपायों पर चर्चा करेंगे।
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AI हेलुसिनेशन का उदय

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की एक गंभीर समस्या, जिसे 'AI हेलुसिनेशन' कहा जाता है, अब एक बड़ा साइबर खतरा बन चुकी है। हैकर्स इस कमजोरी का लाभ उठाकर 'AI स्क्वैटिंग' के माध्यम से लोगों को धोखा दे रहे हैं। इस प्रकार के हमले में, हैकर्स पहले से अनुमान लगाते हैं कि AI कौन सी गलत वेबसाइट या सॉफ्टवेयर का नाम ले सकता है। इसके बाद, वे उन नामों को खरीद लेते हैं और जब कोई उपयोगकर्ता AI के सुझाव पर क्लिक करता है, तो वह सीधे हैकर्स के जाल में फंस जाता है।


AI की गलतियों का दुरुपयोग

AI टूल्स कभी-कभी ऐसे वेबसाइट लिंक या सॉफ्टवेयर के नाम उत्पन्न कर देते हैं जो वास्तव में मौजूद नहीं होते। पहले इसे एक छोटी सी गलती समझा जाता था, लेकिन अब यह एक गंभीर सुरक्षा मुद्दा बन गया है। हैकर्स AI की इन गलतियों का उपयोग कर रहे हैं। वे उन वेबसाइटों और सॉफ्टवेयर के नामों को पहले से रजिस्टर कर लेते हैं जिनके बारे में AI से गलत जानकारी मिलने की संभावना होती है। जब आप AI पर भरोसा करके उन लिंक्स पर क्लिक करते हैं, तो आप अनजाने में किसी ऐसी वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं जहां आपकी जानकारी चोरी हो सकती है या आपके कंप्यूटर में वायरस आ सकता है।


फैंटम स्क्वैटिंग का खतरा

'फैंटम स्क्वैटिंग' का अर्थ है उन वेबसाइटों के पतों को खरीदना जिन्हें AI गलती से उत्पन्न करता है। पालो ऑल्टो नेटवर्क्स की यूनिट 42 रिसर्च टीम ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी है। हैकर्स पहले कई AI से सवाल पूछकर यह पता लगाते हैं कि वे कौन सी नकली वेबसाइटों के नाम ले रहे हैं। इसके बाद, वे चेक करते हैं कि कौन सी वेबसाइटें उपलब्ध हैं और उन्हें खरीद लेते हैं। फिर, वे एक ऐसी नकली वेबसाइट बनाते हैं जो देखने में वास्तविक लगती है। एक बार, एक पोस्टल सर्विस की नकली वेबसाइट बनाकर लोगों से पैसे और जानकारी चुराई गई थी। इसके लिए हैकर्स ने AI कोडिंग असिस्टेंट की मदद भी ली थी।


कोडिंग में हैलूस्क्वैटिंग का खतरा

'हैलूस्क्वैटिंग' का खतरा उन लोगों के लिए है जो कोडिंग करते हैं। जब कोई कोडर AI से सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए पूछता है, तो AI कई बार ऐसे सॉफ्टवेयर के नाम बता देता है जो वास्तव में मौजूद नहीं होते। हैकर्स उन नकली नामों पर वायरस वाले सॉफ्टवेयर डाल देते हैं। जब कोई डेवलपर AI द्वारा बताए गए कमांड को अपने कंप्यूटर पर चलाता है, तो उसके कंप्यूटर में वायरस आ जाता है। यह स्थिति बहुत खतरनाक है, क्योंकि कोडिंग में AI की गलतियों की कीमत 85 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक हो सकती है।


इस समस्या का समाधान क्यों मुश्किल है?

इस समस्या का समाधान किसी सॉफ्टवेयर अपडेट या पैच से नहीं किया जा सकता, क्योंकि AI का काम करने का तरीका ही ऐसा है। AI यह जांच नहीं करता कि वेबसाइट या सॉफ्टवेयर वास्तव में है या नहीं, वह केवल शब्दों को जोड़कर उत्तर देता है। यह खतरा तब और बढ़ जाता है जब AI एजेंट अपने आप इंटरनेट पर सर्फिंग या सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने लगते हैं। ऐसे में AI के गलत उत्तर किसी बड़े साइबर हमले का कारण बन सकते हैं।


सुरक्षा के उपाय

यह खतरा अब आम लोगों के साथ-साथ बड़ी कंपनियों के लिए भी बढ़ गया है। रिसर्च में पता चला है कि हैकर्स ने 913 बड़े ब्रांड्स के नाम पर 13,000 से अधिक खतरनाक लिंक और 2,50,000 से ज्यादा ऐसे डोमेन बना लिए हैं जो AI गलती से बता सकता है। कंपनियों को AI द्वारा दिए गए हर लिंक या सॉफ्टवेयर का उपयोग करने से पहले खुद इंटरनेट पर जांच करनी चाहिए।