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Apple ने Nvidia को पछाड़कर फिर से हासिल किया दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी का खिताब

Apple ने एक बार फिर से दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी का खिताब अपने नाम कर लिया है, Nvidia को पीछे छोड़ते हुए। हाल के बदलावों के कारण निवेशक अब AI पर भारी खर्च करने वाली कंपनियों से हटकर Apple की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इस वर्ष Apple के शेयरों में 23% की वृद्धि हुई है, जिससे यह 'मैग्निफिसेंट सेवन' कंपनियों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली कंपनी बन गई है। जानें इस सफलता के पीछे के कारण और निवेशकों का बदलता रुख।
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Apple की नई ऊंचाई


Apple ने एक बार फिर से दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी का खिताब अपने नाम कर लिया है। शुक्रवार को Nvidia के शेयरों में 3.7% की गिरावट आई, जिससे इस चिप निर्माता कंपनी का मार्केट कैप 4.8 ट्रिलियन डॉलर तक गिर गया, जबकि Apple के शेयर में 0.4% की वृद्धि हुई, जिससे इसकी वैल्यूएशन 4.9 ट्रिलियन डॉलर हो गई। पिछले अप्रैल में Nvidia ने Apple को पीछे छोड़कर यह खिताब हासिल किया था।


निवेशकों का बदलता रुख

Apple, जो iPhone बनाती है, को टेक्नोलॉजी क्षेत्र में हो रहे बदलाव का लाभ मिल रहा है। निवेशक अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भारी खर्च करने वाली कंपनियों से हटकर अन्य कंपनियों की ओर ध्यान दे रहे हैं।


इस वर्ष का प्रदर्शन

Apple का प्रदर्शन इस वर्ष शानदार रहा है। जून के निचले स्तर से इसके स्टॉक में 21% की वृद्धि हुई है। इस साल में इसकी कुल वृद्धि 23% रही है, जिससे यह 'मैग्निफिसेंट सेवन' कंपनियों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली कंपनी बन गई है। टेक-हेवी Nasdaq 100 इंडेक्स में 2026 में 12% की वृद्धि हुई है और S&P 500 इंडेक्स में 8.6% की बढ़त दर्ज की गई है।


AI में निवेश से दूरी

Apple के शेयरों में हाल की मजबूती तब आई है, जब निवेशक टेक्नोलॉजी क्षेत्र के अन्य हिस्सों, विशेषकर AI पर भारी खर्च करने वाली कंपनियों से अपना पैसा निकाल रहे हैं। निवेशकों को चिंता है कि इन कंपनियों में आई तेजी शायद जरूरत से ज्यादा हो गई है। हाल ही में Apple को चीन में 'Apple Intelligence' लॉन्च करने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित सरकारी मंजूरी भी मिली है, जिससे कंपनी की ग्रोथ में तेजी आने की उम्मीद है।


Apple का आकर्षक मॉडल

इस साल Apple के शेयरों में लगभग 23% की वृद्धि हुई है और इसने बाजार में बेहतर प्रदर्शन किया है। निवेशक इसके AI एजेंडे और कम पूंजी खर्च वाले मॉडल को पसंद कर रहे हैं, जबकि अन्य कंपनियां इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रही हैं।