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BRICS की आर्थिक स्थिति: चीन के बिना ग्रोथ का दावा कमजोर

प्रख्यात अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने BRICS समूह की आर्थिक स्थिति पर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। उन्होंने आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए बताया कि चीन के बिना, BRICS का 'वैश्विक आर्थिक महाशक्ति' बनने का दावा कमजोर हो जाता है। भल्ला के अनुसार, चीन की तेज आर्थिक प्रगति के कारण ही BRICS की वैश्विक आय में हिस्सेदारी बढ़ी है। इस लेख में, भल्ला ने भारत की स्थिति और BRICS के अन्य सदस्यों की आर्थिक प्रगति पर भी चर्चा की है।
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BRICS की बढ़ती ताकत पर नया विश्लेषण

प्रख्यात अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने 'ब्रिक्स' (BRICS) समूह की वैश्विक आर्थिक स्थिति पर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। अपने सबस्टैक लेख "BRICS: A Club of One" में, भल्ला ने आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए कहा है कि यदि चीन के आंकड़ों को हटा दिया जाए, तो ब्रिक्स का 'वैश्विक आर्थिक महाशक्ति' बनने का दावा पूरी तरह से कमजोर हो जाता है.


आंकड़ों का विश्लेषण: चीन की भूमिका

भल्ला के अनुसार, 2011 से 2025 के बीच ब्रिक्स की वैश्विक आय में हिस्सेदारी 21.9% से बढ़कर 28.9% हुई है, लेकिन यह वृद्धि केवल चीन की तेज आर्थिक प्रगति के कारण है.


2011 से 2025 के बीच ब्रिक्स की आय में कुल बढ़ोतरी में चीन का योगदान 72% रहा है.


अन्य सदस्यों की स्थिति

चीन को छोड़कर, अन्य 10 ब्रिक्स देशों की विश्व आय में हिस्सेदारी 2011 में 11.9% थी, जो 2025 में घटकर 11.5% रह गई.


2011 में ब्रिक्स की कुल आय में चीन का हिस्सा 45.6% था, जो 2025 तक बढ़कर 60.2% हो गया.


BRICS की जनसंख्या और आय

भल्ला बताते हैं कि इस समूह की जनसंख्या में बहुत कम बदलाव हुआ है - 2011 में 50.9% से घटकर 2025 में 50.5% रह गई. इसका मतलब है कि BRICS दुनिया की लगभग आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन वैश्विक आय में इसकी हिस्सेदारी तीन-दशमलव से भी कम है.


व्यापार में चीन का दबदबा

भल्ला ने बताया कि 2011 में BRICS के सामान के निर्यात में हिस्सेदारी 23% से बढ़कर 2023 में 25% हो गई, लेकिन यदि चीन को हटा दिया जाए, तो यह हिस्सा 12.4% से घटकर 10.1% रह जाता है.


उन्होंने यह भी बताया कि 2011 और 2023 के बीच BRICS के सामान के निर्यात में हुई बढ़ोतरी में चीन का योगदान 94% था.


भारत की स्थिति

भल्ला का भारत के बारे में आकलन सकारात्मक है। वे इसे BRICS के पांच पुराने सदस्यों में दूसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला देश मानते हैं.


भारत की वैश्विक आय में हिस्सेदारी 2011 में 2.5% से बढ़कर 2025 में 3.5% हो गई, लेकिन सामान के निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 1.71% से बढ़कर 1.88% हुई, जो कि मामूली वृद्धि है.


BRICS की आर्थिक प्रगति पर सवाल

भल्ला का मुख्य तर्क यह है कि भारत को BRICS की बढ़ती वैश्विक पहचान और अपनी आर्थिक प्रगति के बीच भ्रमित नहीं होना चाहिए.


उन्होंने कहा कि BRICS का कोई कॉमन मार्केट या बाध्यकारी आर्थिक कमिटमेंट नहीं है, इसलिए इसके सदस्यों के आर्थिक प्रदर्शन का श्रेय केवल इस समूह की सदस्यता को नहीं दिया जा सकता.


भविष्य की संभावनाएं

भल्ला ने कहा कि यदि BRICS से स्पष्ट आर्थिक लाभ दिखते हैं, तो वे अपनी राय पर पुनर्विचार कर सकते हैं. लेकिन अब तक, ऐसा कोई भी संकेत नहीं मिला है.