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BSNL और MTNL: एक समय की टेलीकॉम दिग्गजों की कहानी

BSNL और MTNL, जो कभी भारत के टेलीकॉम क्षेत्र के दिग्गज थे, अब प्राइवेट कंपनियों के दबदबे के कारण हाशिए पर हैं। इस लेख में हम इन कंपनियों के सुनहरे दिनों से लेकर वर्तमान चुनौतियों तक की यात्रा का विश्लेषण करेंगे। जानें कैसे तकनीकी कमी और नीतिगत असफलताओं ने इन सरकारी कंपनियों को संकट में डाल दिया। क्या BSNL और MTNL अपने खोए हुए गौरव को वापस पा सकेंगे? इस लेख में जानें।
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बीएसएनएल और एमटीएनएल का सुनहरा दौर

क्या आपको भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) और महानगर संचार निगम लिमिटेड (MTNL) का नाम याद है? यदि आप 2000 से 2008 के बीच के समय को याद करते हैं, तो ये दोनों कंपनियां थीं जिनके सिम कार्ड के लिए लोग लंबी कतारों में खड़े होते थे। सिम कार्ड पाने के लिए इंतजार करना एक आम बात थी। जिनके पास 9415... जैसे नंबर होते थे, वे खुद को विशेष समझते थे। यह वह समय था जब भारत में मोबाइल फोन धीरे-धीरे लोगों की जेब में आने लगे थे। किसी के पास मोटोरोला का फोन होता था, तो किसी के हाथ में नोकिया। उस समय मोबाइल को 'सेलफोन' कहने का चलन था।


प्राइवेट कंपनियों का उदय

यह BSNL और MTNL का स्वर्णिम युग था। भारत में प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियां पहले से ही सक्रिय थीं। 1995 में मोदी टेल्स्ट्रा ने कदम रखा, और उसी वर्ष सुनील मित्तल की कंपनी ने दिल्ली में AirTel के नाम से GSM नेटवर्क सेवा शुरू की। इसके बाद बीपीएल, हचसिन मैक्स, एस्कॉटेल, बिड़ला एंटीएंडटी, स्पाइस टेलकॉम और एयरसेल जैसी कंपनियों ने भी अपनी सेवाएं शुरू कीं।


इन कंपनियों ने अच्छा काम किया, लेकिन कॉल दरें महंगी थीं। कॉलिंग के चार्ज 17 रुपये तक थे। 2001 में MTNL-डॉल्फिन ने दिल्ली और मुंबई में अपनी सेवाएं शुरू कीं। 2002 में BSNL-सेलवन ने भी अपनी सेवाएं दीं।


नेटवर्क की उपलब्धता

लोगों का कहना था कि BSNL का नेटवर्क हर जगह उपलब्ध है। नेपाल-सिद्धार्थनगर सीमा से लेकर बांग्लादेश, चीन, पाकिस्तान, म्यांमार और भूटान तक इसके सिग्नल पहुंचते थे। कई दुर्गम क्षेत्रों में BSNL ही एकमात्र ऑपरेटर था। अब आंकड़े बताते हैं कि सरकारी टेलीकॉम कंपनियां हाशिए पर हैं, और 94 प्रतिशत से अधिक बाजार प्राइवेट कंपनियों के हाथ में है।


BSNL और MTNL: एक समय की टेलीकॉम दिग्गजों की कहानी


टेलीकॉम सेक्टर में निजी कंपनियों का दबदबा

टेलीकॉम एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने 12 अक्टूबर 2026 को टेलीकॉम सेवाओं की परफॉर्मेंस रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून 2026 तक देश के कुल टेलीकॉम ग्राहकों में निजी ऑपरेटरों की हिस्सेदारी 92.50 प्रतिशत थी, जबकि सरकारी कंपनियों के पास केवल 7.50 प्रतिशत ग्राहक थे।


मार्च 2026 के अंत में देश में कुल टेलीफोन ग्राहकों की संख्या 1,330.58 मिलियन थी, जो जून 2026 के अंत तक बढ़कर 1,348.08 मिलियन हो गई।


कमाई के आंकड़े

टेलीकॉम सेक्टर का एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) जून 2026 की तिमाही में 88,796 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले तिमाही की तुलना में 2.40 प्रतिशत अधिक है। वायरलेस सेवा की प्रति ग्राहक औसत मासिक कमाई (ARPU) 184.91 रुपये से बढ़कर 187.12 रुपये हो गई।


BSNL और MTNL की चुनौतियाँ

BSNL के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कंपनी की दुर्दशा तकनीकी कमी के कारण नहीं, बल्कि नीतियों की कमी और भ्रष्टाचार के कारण हुई है। जब प्राइवेट कंपनियां 4G और 5G की दौड़ में थीं, तब BSNL आवश्यक उपकरणों के लिए संघर्ष कर रहा था।


अधिकारी ने कहा कि BSNL के घाटे का मुख्य कारण 4G सेवा का अभाव और लैंडलाइन से कमाई में गिरावट है।


क्या BSNL उबर पाएगा?

भारत सरकार ने 5 अगस्त 2026 को बताया कि BSNL ने 25 जुलाई 2026 तक 98,550 इंडिजेनस 4G साइट्स स्थापित की हैं। भारतनेट प्रोजेक्ट के तहत सभी ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी देने की योजना है।