EPF कटौती के लिए वेतन सीमा बढ़ी: जानें इसका प्रभाव
EPF नई सीमा का ऐलान
EPF नई सीमा: मोदी सरकार ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। EPF कटौती के लिए कर्मचारियों की वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है। यह निर्णय केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया। इस कदम से 51 लाख लोगों को लाभ मिलेगा। 12 साल के लंबे इंतजार के बाद इस संशोधन से संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की पेंशन और भविष्य निधि (PF) में बड़ा इजाफा होगा।
नई सीमा 25,000 रुपये
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी, "वर्तमान PF (प्रोविडेंट फंड) नियमों के अनुसार, सैलरी की सीमा 15,000 रुपये थी। यह सीमा 2014 में निर्धारित की गई थी। अब इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।"
उन्होंने आगे बताया, "नई PF कटौती सीमा 25,000 रुपये प्रति माह होगी, जिससे लगभग 51 लाख कर्मचारियों को लाभ होगा। जो कर्मचारी 15,000 रुपये से 25,000 रुपये की सैलरी में आते हैं, वे अब नए PF नियमों के अंतर्गत आ जाएंगे। इस पर भारत सरकार का अनुमानित खर्च हर साल लगभग 11,339 करोड़ रुपये होगा।"
लिमिट में वृद्धि
EPFO के तहत अनिवार्य पीएफ और पेंशन कवरेज के लिए बेसिक सैलरी + डीए (Basic Pay + DA) की सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है।
51 लाख कर्मचारियों को लाभ
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, जो कर्मचारी ₹15,000 से अधिक वेतन के कारण अब तक अनिवार्य पीएफ दायरे से बाहर थे, उनमें से लगभग 51 लाख नए कर्मचारी अब सीधे इसके दायरे में आ जाएंगे।
खजाने पर ₹11,339 करोड़ का बोझ
केंद्र सरकार कर्मचारियों के पेंशन फंड (EPS) में अपना अंशदान बढ़ाएगी, जिस पर सरकार का कुल खर्च ₹11,339 करोड़ आएगा।
वेज सीलिंग का अर्थ
वेज सीलिंग का सरल अर्थ है 'अनिवार्य सरकारी नियम के लिए तय की गई अधिकतम सैलरी की सीमा'। पीएफ के संदर्भ में यह वह दायरा है जो यह तय करता है कि कंपनी को किस सैलरी लिमिट तक के कर्मचारियों का पीएफ काटना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। अब यह सीमा ₹25,000 कर दी गई है।
सैलरी और बचत पर प्रभाव
इस निर्णय का नौकरीपेशा कर्मचारियों की जेब और रिटायरमेंट फंड दोनों पर मिश्रित प्रभाव पड़ेगा।
टेक-होम सैलरी में कमी: ₹15,000 से ₹25,000 के बीच बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों की पीएफ कटौतियां (12% की दर से) बढ़ेंगी, जिससे हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है।
रिटायरमेंट फंड और पेंशन में वृद्धि: पीएफ खाते में कर्मचारी और कंपनी दोनों का अंशदान बढ़ने से लंबे समय में रिटायरमेंट कॉर्पस काफी बड़ा बनेगा।
कंपनियों पर वित्तीय बोझ
पीएफ सीमा बढ़ने का असर कंपनियों के पेरोल बजट पर भी पड़ेगा। अब तक कंपनियां केवल ₹15,000 तक की बेसिक सैलरी पर 12% पीएफ अंशदान देने के लिए बाध्य थीं। नए नियम के बाद ₹25,000 तक की सैलरी वाले वर्कफोर्स के लिए कंपनियों को अधिक अंशदान देना होगा।
