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IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री: कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स का बड़ा निवेश

IDBI बैंक में हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया में कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स का बड़ा निवेश सामने आया है। सरकार ने इस बिक्री को मंजूरी दी है, जिससे बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी निवेश का एक नया अध्याय शुरू होगा। हालांकि, इस निर्णय का विरोध भी हो रहा है, खासकर बैंक यूनियनों द्वारा। जानें इस बिक्री के पीछे की कहानी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री की मंजूरी


IDBI बैंक की बिक्री: सरकार ने सरकारी कंपनियों में विनिवेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए IDBI बैंक में हिस्सेदारी बेचने की स्वीकृति दी है। कनाडाई फर्म फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स IDBI बैंक में लगभग 53,000 करोड़ रुपये (5.5 अरब डॉलर) में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी। यह भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश होगा और यह बैंकिंग निजीकरण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।


बैंक की हिस्सेदारी का विवरण

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने फेयरफैक्स की सहायक कंपनी 'M/s 10955230 कनाडा इंक' को रणनीतिक खरीदार के रूप में मंजूरी दी है। यह कंपनी सरकार की 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी (लगभग 26,620 करोड़ रुपये) और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी (लगभग 26,440 करोड़ रुपये) खरीदेगी।


प्रति शेयर मूल्य

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, फेयरफैक्स प्रति शेयर 81 रुपये का भुगतान करेगी। यह मूल्य दो स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों द्वारा निर्धारित 75.99 रुपये के 'फेयर वैल्यू' से अधिक है।


शेयर में गिरावट

गुरुवार को IDBI बैंक के शेयरों में 7 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जिससे पिछले सत्र में हुई तेजी का असर कम हो गया। यह गिरावट तब आई जब निवेशकों ने फेयरफैक्स द्वारा IDBI बैंक में हिस्सेदारी खरीदने के प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया दी।


शेयर का वर्तमान मूल्य

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर, शेयर 7.54 प्रतिशत गिरकर 83.62 रुपये पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर इसमें 7.48 प्रतिशत की कमी आई और यह भी 83.62 रुपये पर बंद हुआ। बुधवार को इस घोषणा से पहले IDBI बैंक के शेयरों में 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।


बैंक यूनियनों का विरोध

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री के निर्णय का कड़ा विरोध किया है। संगठन का कहना है कि सरकार और LIC के पास मिलाकर बैंक की लगभग 94% हिस्सेदारी है, फिर भी बैंक का नियंत्रण एक विदेशी निवेशक को सौंपा जा रहा है।