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LPG उत्पादन में वृद्धि: भारत ने रिफाइनरियों के लिए नया लक्ष्य निर्धारित किया

भारत सरकार ने वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच LPG उत्पादन के लिए नया लक्ष्य निर्धारित किया है। यह कदम घरेलू गैस की आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। नए लक्ष्य के तहत, 21 कंपनियों को प्रतिदिन 63,810 टन LPG उत्पादन करने का निर्देश दिया गया है, जो देश की कुल खपत का लगभग 70% कवर करेगा। जानें इस फैसले के पीछे की वजह और इसके संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं।
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नई दिल्ली में LPG उत्पादन का नया टारगेट


नई दिल्ली: वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के चलते, केंद्र सरकार ने पहली बार देश की रिफाइनरियों के लिए LPG उत्पादन का अधिकतम लक्ष्य निर्धारित किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि आयातित कुकिंग गैस की आपूर्ति बाधित होती है, तो घरेलू भंडार से कमी न आए।


63,810 टन प्रतिदिन का उत्पादन लक्ष्य

13 अगस्त को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक आदेश जारी किया। इसके तहत 21 सार्वजनिक, निजी और अपस्ट्रीम कंपनियों को कुल 63,810 टन LPG प्रतिदिन उत्पादन करने का लक्ष्य दिया गया है। यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में हुए घरेलू LPG उत्पादन से दोगुना से अधिक है।


वर्तमान में, भारत प्रतिदिन लगभग 91,000 टन LPG का उपभोग करता है। नया लक्ष्य देश की कुल खपत का लगभग 70% कवर करेगा। यह सीमा केवल तब लागू होगी जब आयात में कोई समस्या आएगी।


रिलायंस को मिला सबसे बड़ा कोटा

18 सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों को मिलाकर 31,470 टन प्रतिदिन का लक्ष्य दिया गया है। निजी क्षेत्र में रिलायंस सबसे आगे है, जिसे जामनगर की DTA रिफाइनरी के लिए अकेले 18,000 टन प्रतिदिन का लक्ष्य दिया गया है। इसके बाद BPCL कोच्चि को 4,800 टन और नायरा एनर्जी वडीनार को 4,480 टन का लक्ष्य मिला है।


इन तीनों की कुल क्षमता 27,280 टन प्रतिदिन है। रिलायंस की निर्यात-उन्मुख रिफाइनरी को इस सूची में शामिल नहीं किया गया है। ONGC और GAIL जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों को प्राकृतिक गैस से LPG बनाने के लिए 6,460 टन प्रतिदिन का लक्ष्य दिया गया है।


इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीक पर ध्यान

सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे LPG के भंडारण, निकासी और परिवहन के लिए आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करें, चाहे वह स्वयं करें या रेलवे-टैंकर के माध्यम से। इसके साथ ही, नैफ्था-से-LPG परिवर्तन और FCC यूनिट्स को पेट्रो-FCC में अपग्रेड करने जैसी तकनीकों का उपयोग करके उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा गया है। हर 6 महीने में इस लक्ष्य की समीक्षा की जाएगी। नई रिफाइनरियों और अपग्रेड से बनी अतिरिक्त क्षमता भी इसमें शामिल की जाएगी।


इस फैसले की आवश्यकता क्यों?

यह ध्यान देने योग्य है कि भारत ने 2025-26 में 33.2 मिलियन टन LPG का उपयोग किया, जिसमें 13.1 मिलियन टन घरेलू और 21.3 मिलियन टन आयातित था। इसका मतलब है कि देश की 64% से अधिक निर्भरता विदेशी स्रोतों पर है। ईरान-इजरायल के बीच तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति रुकने का खतरा बढ़ गया है।


भारत अपना 90% LPG आयात सऊदी जैसे देशों से इसी मार्ग से करता है। पहले सरकार ने औद्योगिक LPG बिक्री पर रोक लगाई, रिफिल की समय सीमा बढ़ाई और PNG अपनाने को कहा था। अब उन अस्थायी उपायों को स्थायी प्रणाली में परिवर्तित किया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि भविष्य में यदि आपूर्ति बाधित होती है, तो भी घरों में सिलेंडर की कमी, राशनिंग या देरी नहीं होगी।