UPI पर MDR लागू होने से उठे सवाल: क्या यह भुगतान प्रणाली अब महंगी होगी?
UPI पर MDR की चर्चा
हाल ही में UPI पर लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर काफी बहस हो रही है। सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, 2000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर MDR लागू होगा, जो दुकानदार को देना होगा। इस मुद्दे पर विभिन्न दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं। एक पक्ष इसे UPI की मुफ्त सेवा के अंत के रूप में देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे एक महंगे खर्च के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। हालांकि, एक तथ्य यह है कि UPI को संचालित करने वाली संस्था, नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI), को कोई नुकसान नहीं हो रहा है।
ATM और अन्य लेनदेन पर खर्च
इसके विपरीत, एटीएम संचालन, मुद्रा छापने और अन्य लेनदेन पर बैंकों का खर्च काफी अधिक होता है। यही कारण है कि बैंक अकाउंट मेंटेनेंस, एटीएम कार्ड लेनदेन और अन्य सेवाओं के लिए शुल्क लेते हैं। अब UPI के लिए भी इसी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि इसकी प्रमुख विशेषता यह है कि यह सुरक्षित और त्वरित भुगतान की सुविधा प्रदान करता है। UPI ने न केवल भारत में, बल्कि कई अन्य देशों में भी भुगतान को सरल बनाया है।
अशनीर ग्रोवर का सवाल
इस संदर्भ में, निवेशक और व्यवसायी अशनीर ग्रोवर ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक चैनल की डिबेट में भाग लेते हुए कहा, 'भारत में कोई भी 5 मिनट में जानकारी प्राप्त कर सकता है। RBI का सरप्लस सरकार को 2.87 लाख करोड़ मिलता है। लिस्टेड बैंकों का लाभ 4.11 लाख करोड़ है और NPCI का सरप्लस 1888 करोड़ है। तो UPI से नुकसान किसका हो रहा है?'
UPI की कार्यप्रणाली
UPI, जिसका पूरा नाम यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफेस है, को NPCI ने विकसित किया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आप बिना अकाउंट नंबर के भी पैसे भेज सकते हैं। QR कोड स्कैन करके या वर्चुअल पेमेंट एड्रेस का उपयोग करके भुगतान किया जा सकता है। UPI, इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) और आधार एनेबेल्ड पेमेंट सिस्टम (AEPS) का उपयोग करता है।
NPCI का गठन और कार्य
NPCI का गठन 2008 में हुआ था, और यह भारत के रिजर्व बैंक और भारतीय बैंकों के संघ का एक संयुक्त प्रयास है। यह एक गैर-लाभकारी संस्था है जिसका उद्देश्य भारत में भुगतान प्रणाली को बेहतर बनाना है। NPCI कई प्रमुख बैंकों द्वारा संचालित होती है और यह RuPay, FASTag, IMPS जैसी सेवाओं का संचालन करती है।
NPCI की कमाई के स्रोत
NPCI की कमाई का मुख्य स्रोत भुगतान सेवाएं हैं। इसके अलावा, यह ब्याज और नेटवर्क से भी कमाई करती है। NPCI ने अपने पैसे विभिन्न बैंकों में जमा किए हैं और सरकारी बांड में निवेश किया है।
सरकार की इंसेंटिव योजना
केंद्र सरकार ने 'इंसेंटिव स्कीम फॉर द प्रमोशन ऑफ रूपे डेबिट कार्ड्स एंड लो-वैल्यू BHIM-UPI ट्रांजैक्शन्स (P2M)' नामक योजना शुरू की है। इसके तहत, छोटे व्यवसायियों को 2000 रुपये से कम के UPI लेनदेन पर सब्सिडी दी जाती है।
