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UPI ट्रांजैक्शन पर MDR चार्ज: क्या ग्राहकों को देना होगा भुगतान?

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के संभावित चार्ज के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार MDR लागू करती है, तो यह तय करना कि इसका खर्च कौन उठाएगा, जल्दबाजी होगी। वर्तमान में, यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं है, लेकिन भविष्य में 2000 रुपये से अधिक के व्यापारिक लेनदेन पर MDR लागू किया जा सकता है। जानें इस विषय पर और क्या बदलाव हो सकते हैं और सरकार ने जीरो-MDR क्यों लागू किया था।
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नई दिल्ली में RBI गवर्नर का बयान


नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में कहा कि यदि सरकार कुछ यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की अनुमति देती है, तो यह तय करना कि इसका खर्च कौन उठाएगा, अभी जल्दबाजी होगी। 5 अगस्त को मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद, गवर्नर ने स्पष्ट किया कि डिजिटल भुगतान प्रणाली मुफ्त नहीं होती हैं और इसकी लागत किसी न किसी को उठानी पड़ेगी।


क्या ग्राहकों को भुगतान करना होगा?

वर्तमान में, ग्राहकों, दुकानदारों या किसी भी प्रकार के यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया है। हाल ही में संसद में पेश किए गए 'कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक 2026' में यूपीआई शुल्क, MDR की दर या 2000 रुपये की किसी सीमा का उल्लेख नहीं है। MDR वह शुल्क है जो दुकानदार डिजिटल भुगतान की सुविधा के लिए बैंक या भुगतान कंपनियों को देते हैं। यह सीधे ग्राहकों पर लागू होने वाला कर या शुल्क नहीं है।


भविष्य में संभावित बदलाव

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि सरकार 2000 रुपये से अधिक के व्यापारिक यूपीआई लेनदेन पर 0.5% से कम का MDR लागू कर सकती है। हालांकि, आम लोगों के बीच होने वाले व्यक्तिगत ट्रांसफर पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।


नए विधेयक के प्रावधान

वर्तमान नियमों के अनुसार, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 के तहत बैंकों या कंपनियों को यूपीआई और रूपे डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर कोई भी शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं है। नया विधेयक इसी नियम में बदलाव का प्रस्ताव रखता है। इसके पारित होने के बाद, सरकार यह तय कर सकेगी कि कौन से डिजिटल भुगतान पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे और किस पर शुल्क लिया जा सकता है। जब तक यह विधेयक कानून नहीं बनता और सरकार अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक जीरो-MDR यानी मुफ्त भुगतान का नियम लागू रहेगा।


MDR पर चर्चा का कारण

खबरों के अनुसार, 2000 रुपये से अधिक के व्यापारिक भुगतान पर MDR लगाने के अलावा दुकानदारों के वार्षिक टर्नओवर के अनुसार शुल्क तय करने पर विचार चल रहा है। हालांकि, ये सभी केवल सुझाव हैं और इन्हें विधेयक में शामिल नहीं किया गया है।


सरकार ने जीरो-MDR क्यों लागू किया?

डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने जनवरी 2020 में यूपीआई और रूपे डेबिट कार्ड से MDR को पूरी तरह समाप्त कर दिया था। इसके बाद, बैंकों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। दूसरी ओर, बैंकों और भुगतान कंपनियों का तर्क है कि सर्वर, साइबर सुरक्षा और नई तकनीक पर भारी खर्च होता है।


UPI प्रणाली को बेहतर बनाए रखने के लिए आय का एक स्रोत होना आवश्यक है। जुलाई में, UPI के माध्यम से 29.88 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड 23.66 अरब लेनदेन हुए हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाते हैं।