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UPI शुल्क पर बहस: अश्नीर ग्रोवर की चिंताएँ और सरकार की स्थिति

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर संभावित शुल्क को लेकर बहस तेज हो गई है। भारतपे के पूर्व सह-संस्थापक अश्नीर ग्रोवर ने सरकार के इस कदम की आलोचना की है, यह कहते हुए कि शुल्क लगाना टैक्स वसूलने जैसा होगा। उन्होंने यह भी बताया कि ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर शुल्क की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। ग्रोवर ने चेतावनी दी है कि इससे ग्राहक और व्यापारी फिर से नकद लेनदेन की ओर लौट सकते हैं। जानें इस मुद्दे पर और क्या चिंताएँ हैं और ग्राहकों पर इसका क्या असर हो सकता है।
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UPI शुल्क पर नई बहस का आगाज़


नई दिल्ली: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर संभावित शुल्क को लेकर एक नई चर्चा शुरू हो गई है। भारतपे के पूर्व सह-संस्थापक अश्नीर ग्रोवर ने सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि शुल्क लगाना एक प्रकार से टैक्स वसूलने जैसा होगा। सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार, ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। हालांकि, ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर शुल्क की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।


सरकार का नोटिफिकेशन और अस्पष्टता

सरकार के नोटिफिकेशन में यह स्पष्ट किया गया है कि ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं होगा। लेकिन ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लगेगा या नहीं, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस स्थिति में भुगतान की जिम्मेदारी व्यापारी की होगी या किसी अन्य पक्ष की। इसी अस्पष्टता ने UPI शुल्क पर बहस को और बढ़ा दिया है।


ग्रॉवर की चिंताएँ

UPI शुल्क पर ग्रोवर की राय


CNN-News18 के साथ बातचीत में, अश्नीर ग्रोवर ने कहा कि यदि UPI पर शुल्क लगाया गया, तो ग्राहक और व्यापारी फिर से नकद लेनदेन की ओर लौट सकते हैं। उनका तर्क है कि इससे बैंकों और व्यापारियों के लिए नकद प्रबंधन का खर्च बढ़ेगा। ग्रोवर के अनुसार, जो डिजिटल भुगतान प्रणाली पहले से ही सुचारू रूप से चल रही है, उसमें शुल्क लगाना उचित नहीं है।


लेनदेन की सीमा पर सवाल

4 प्रतिशत लेनदेन, लेकिन 66 प्रतिशत मूल्य


ग्रोवर ने ₹2,000 की सीमा पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के लेनदेन कुल संख्या में केवल 4 प्रतिशत हैं, लेकिन इनका कुल मूल्य 66 प्रतिशत है। उनका आरोप है कि इसी आधार पर एक आसान सीमा तय की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि संभावित शुल्क का बोझ व्यापारी ग्राहकों पर डाल सकते हैं।


ग्राहकों पर प्रभाव

ग्राहकों पर पड़ सकता है असर


अश्नीर ग्रोवर ने यह आशंका जताई कि व्यापारी शुल्क से बचने के लिए ग्राहकों को कई छोटे UPI भुगतान करने के लिए कह सकते हैं, जिससे भुगतान प्रक्रिया जटिल हो सकती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकार UPI को लेकर किस प्रकार की सब्सिडी देती है, जिसकी भरपाई के लिए नया शुल्क आवश्यक बताया जा रहा है। उनके अनुसार, इस निर्णय के पीछे स्पष्ट आर्थिक तर्क होना चाहिए।


ATM और नकदी प्रबंधन की तुलना

ATM और नकदी व्यवस्था से तुलना


ग्रोवर ने UPI की तुलना देश के ATM और नकदी प्रबंधन तंत्र से की। उन्होंने कहा कि भारत में ATM और कैश लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को चलाने की सालाना लागत लगभग ₹30,500 करोड़ है। इसी संदर्भ में उन्होंने RBI, बैंकों और NPCI की वित्तीय स्थिति का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि आखिर UPI के कारण वास्तविक नुकसान किसे हो रहा है। फिलहाल UPI शुल्क का अंतिम स्वरूप स्पष्ट होना बाकी है।