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अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति में वृद्धि, प्याज की कीमतों में भारी उछाल

अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति 4.82 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो भारतीय रिजर्व बैंक के लक्ष्य से अधिक है। प्याज की कीमतों में भारी उछाल के साथ-साथ थोक मूल्य सूचकांक भी बढ़ा है। यह स्थिति आरबीआई की मौद्रिक नीति पर प्रभाव डाल सकती है। जानें इस मुद्रास्फीति के पीछे के कारण और विभिन्न राज्यों में इसके आंकड़े।
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खुदरा मुद्रास्फीति का बढ़ता आंकड़ा

अगस्त महीने में प्याज और अन्य खाद्य सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि के कारण खुदरा मुद्रास्फीति 4.82 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक के चार प्रतिशत के मध्य अवधि लक्ष्य से अधिक है। यह जानकारी सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों से प्राप्त हुई।


थोक मूल्य सूचकांक में वृद्धि

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति भी अगस्त में बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 9.78 प्रतिशत थी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में 4.45 प्रतिशत थी। यह अगस्त का आंकड़ा जनवरी से लागू नई शृंखला के बाद से सबसे अधिक है।


आरबीआई की मौद्रिक नीति पर प्रभाव

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अगली बैठक में सीपीआई का यह बढ़ा हुआ स्तर नीतिगत ब्याज दरों के निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के अनुसार, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खुदरा मुद्रास्फीति क्रमशः 5.23 प्रतिशत और 4.31 प्रतिशत रही।


प्याज की कीमतों में उछाल

अगस्त में प्याज की महंगाई दर जुलाई के 22.54 प्रतिशत से बढ़कर 48.27 प्रतिशत हो गई। इस दौरान लहसुन और अदरक की कीमतों में भी तेजी आई, जबकि टमाटर, आलू, भिंडी और परवल की कीमतों में गिरावट देखी गई।


राज्यों में मुद्रास्फीति का अंतर

राज्यों में तेलंगाना में सबसे अधिक खुदरा मुद्रास्फीति 6.27 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि मिजोरम में यह सबसे कम 2.35 प्रतिशत रही। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति का अनुमान पांच प्रतिशत रखा है।


सरकार की जिम्मेदारी

सरकार ने आरबीआई को मुद्रास्फीति को दो से छह प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी है। खाद्य, ईंधन और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण डब्ल्यूपीआई आधारित मुद्रास्फीति भी अगस्त में 9.92 प्रतिशत तक पहुंच गई।