अगस्त में थोक मुद्रास्फीति में वृद्धि, खाद्य और ईंधन की कीमतों का असर
थोक मुद्रास्फीति में वृद्धि का कारण
अगस्त में थोक मुद्रास्फीति 9.92 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो जुलाई में 9.78 प्रतिशत थी। यह जानकारी सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों से सामने आई है। खाद्य सूचकांक में मुद्रास्फीति जुलाई के 6.65 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 7.05 प्रतिशत हो गई।
विनिर्मित वस्तुओं और ईंधन की स्थिति
विनिर्मित वस्तुओं की थोक मुद्रास्फीति 8.37 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो जुलाई में 8.29 प्रतिशत थी। ईंधन और बिजली में थोक मुद्रास्फीति 22.93 प्रतिशत रही। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने डब्ल्यूपीआई के आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि खनिज तेल, खाद्य वस्तुएं, खाद्य उत्पादों का विनिर्माण, बुनियादी धातुओं का विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुएं और रसायनों का विनिर्माण अगस्त में थोक मुद्रास्फीति में वृद्धि के प्रमुख कारण रहे।
वैश्विक कारक और मौद्रिक नीति
इस वित्त वर्ष की शुरुआत से थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। पश्चिम एशिया में युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में अवरोध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और उर्वरक की कीमतें बढ़ी हैं। भारत में अधिकांश कच्चे तेल का आयात इसी मार्ग से होता है, जिससे खाद्य कीमतों पर भी प्रभाव पड़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने पिछले महीने नीतिगत दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था।
भविष्य की मुद्रास्फीति की भविष्यवाणी
समिति ने अल नीनो की स्थिति के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमजोर और असमान रहने का हवाला देते हुए 2026-27 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान पांच प्रतिशत रखा है।
