अगस्त में विदेशी वाणिज्यिक उधारी में वृद्धि, कंपनियों ने मांगे 8.13 अरब डॉलर
विदेशी वाणिज्यिक उधारी में वृद्धि
अगस्त में कंपनियों द्वारा विदेशी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के लिए किए गए आवेदनों की कुल राशि 5.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 8.13 अरब डॉलर तक पहुंच गई। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों से प्राप्त हुई है। जुलाई में, कंपनियों ने 7.69 अरब डॉलर की विदेशी वाणिज्यिक उधारी के लिए आवेदन किया था।
आवेदनों का विवरण
अगस्त में दाखिल कुल आवेदनों में सामान्य अनुमति के तहत 7.95 अरब डॉलर और विशेष अनुमति के तहत 18 करोड़ डॉलर शामिल थे। आंकड़ों के अनुसार, फ्लिपकार्ट इंटरनेट ने तीन साल की अवधि के लिए 1.14 अरब डॉलर के कर्ज के लिए आवेदन किया, जिसे आगे ऋण देने या उप-ऋण देने के लिए उपयोग किया जाएगा।
अन्य कंपनियों के आवेदन
पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन ने सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए चार साल नौ महीने की अवधि के लिए 77.5 करोड़ डॉलर की उधारी का आवेदन किया। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, आरईसी और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने सामान्य कारोबारी जरूरतों और मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए 50-50 करोड़ डॉलर की उधारी के लिए आवेदन किया। ईसीबी के तहत योग्य भारतीय इकाइयां मान्यता प्राप्त विदेशी संस्थाओं से वाणिज्यिक ऋण लेती हैं।
आरबीआई की पहल
आरबीआई ने विदेशी पूंजी के प्रवाह को बढ़ावा देने और देश की बाह्य स्थिति को मजबूत करने के लिए जून में मौद्रिक नीति समिति की बैठक में विशेष एफसीएनआर(बी) सुविधा की शुरुआत की थी, जिसमें मुद्रा जोखिम से बचाव की लागत भी शामिल थी। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंक के विशेष विदेशी मुद्रा उपायों से 31 अगस्त तक कुल 136.38 अरब डॉलर जुटाए गए।
पूंजी प्रवाह की उम्मीद
इसमें एफसीएनआर(बी) जमा के माध्यम से 127.23 अरब डॉलर, विदेशी मुद्रा में परिवर्तनीय बॉंड (ओएफसीबी) के जरिए 5.26 अरब डॉलर और विदेशी वाणिज्यिक उधारी के जरिए 3.89 अरब डॉलर जुटाए गए। मजबूत प्रतिक्रिया के कारण एफसीएनआर(बी) सुविधा 31 अगस्त को निर्धारित समय से एक महीने पहले बंद कर दी गई थी। हालांकि, ईसीबी और ओएफसीबी सुविधा 31 दिसंबर तक उपलब्ध है। इन माध्यमों से पूंजी का प्रवाह बढ़ने की संभावना है।
