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अदाणी पावर और भूटान की डीजीपीसी ने जलविद्युत परियोजना के लिए समझौता किया

अदाणी पावर ने भूटान की सरकारी बिजली कंपनी डीजीपीसी के साथ 770 मेगावाट की चामखारछू-1 जलविद्युत परियोजना के लिए समझौता किया है। यह परियोजना भूटान की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देने में मदद करेगी। निर्माण कार्य 2027 में शुरू होने की उम्मीद है, और इसे छह साल के भीतर चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। अदाणी पावर के प्रबंध निदेशक ने कहा कि यह परियोजना कार्बन उत्सर्जन को कम करने और दीर्घकालिक लाभ प्रदान करने में महत्वपूर्ण होगी।
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भूटान में नई जलविद्युत परियोजना का आगाज़

नयी दिल्ली, 6 अक्टूबर: अदाणी पावर ने भूटान की सरकारी बिजली कंपनी ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन (डीजीपीसी) लिमिटेड के साथ मिलकर 770 मेगावाट की चामखारछू-1 जलविद्युत परियोजना स्थापित करने के लिए एक समझौता किया है। इस संबंध में दोनों कंपनियों ने शेयरधारक समझौते (एसएचए) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह परियोजना दोनों के बीच की दूसरी बड़ी जलविद्युत परियोजना है।


इससे पहले, सितंबर 2025 में 570 मेगावाट की वांगछू जलविद्युत परियोजना के लिए भी समझौता हुआ था। यह परियोजना अदाणी समूह और डीजीपीसी के बीच 5,000 मेगावाट की जलविद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का हिस्सा है। समझौते पर हस्ताक्षर के कार्यक्रम में भूटान के प्रधानमंत्री ल्योंछेन दाशो शेरिंग तोबगे और अन्य प्रमुख व्यक्ति शामिल हुए।


यह परियोजना केंद्रीय भूटान के झेमगांग जिले में चामखारछू नदी पर आधारित होगी। इसे बीओटी (बनाओ-चलाओ और सौंप दो) मॉडल के तहत अदाणी पावर और डीजीपीसी की 49:51 प्रतिशत हिस्सेदारी वाली साझेदारी के माध्यम से विकसित किया जाएगा।


वाणिज्यिक परिचालन शुरू होने के बाद इसकी रियायत अवधि 30 साल होगी। इस परियोजना से भूटान की स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी और क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। निर्माण कार्य 2027 की पहली छमाही में शुरू होने की उम्मीद है, और इसे छह साल के भीतर चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।


अदाणी पावर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अनिल सरदाना ने कहा, "दक्षिण एशिया में ऊर्जा परिवर्तन में जलविद्युत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह परियोजना ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और साझा टिकाऊ लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी। इसके अलावा, गर्मियों में अतिरिक्त हरित बिजली का भारत को निर्यात करने में भी मदद मिलेगी, जिससे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ होगा।"


डीजीपीसी के प्रबंध निदेशक दाशो छेवांग रिनजिन ने कहा, "770 मेगावाट की चामखारछू-1 जलविद्युत परियोजना भूटान की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेगी, विशेषकर सर्दियों में। इसके साथ ही, भारत को अतिरिक्त स्वच्छ ऊर्जा के बेहतर उपयोग और निर्यात के अवसर भी मिलेंगे।"