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अदानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट, MSCI इंडेक्स रीबैलेंसिंग का असर

सोमवार को अदानी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण MSCI इंडेक्स का रीबैलेंसिंग और बाजार में उतार-चढ़ाव है। अदानी एंटरप्राइजेज के शेयर में 8% की कमी आई, जबकि अन्य कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से अदानी ग्रुप की कंपनियों में बड़े फंड प्रवाह की संभावना है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और भारतीय शेयर बाजार पर इसके प्रभाव के बारे में।
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अदानी ग्रुप के शेयरों पर बिकवाली का दबाव


सोमवार को MSCI इंडेक्स के रीबैलेंसिंग और बाजार में उतार-चढ़ाव के चलते अदानी ग्रुप के शेयरों पर भारी बिकवाली का सामना करना पड़ा। अदानी एंटरप्राइजेज का शेयर लगभग 8% गिरकर 2,921 रुपए पर पहुंच गया। इसी तरह, अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस में 7.4% और अदानी ग्रीन एनर्जी में लगभग 7% की कमी आई। इसके अलावा, अदानी पावर 6.5%, अदानी पोर्ट्स 4.11% और अदानी टोटल गैस 2.5% तक गिर गए। अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी के शेयरों में भी गिरावट देखी गई।


MSCI इंडेक्स रीबैलेंसिंग का प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि MSCI इंडेक्स में बदलाव से पहले निवेशकों ने सतर्कता बरती है। हालांकि, इस बदलाव के बाद अदानी ग्रुप की कंपनियों में बड़े फंड प्रवाह की संभावना है। अनुमान है कि अदानी एंटरप्राइजेज में लगभग 202 मिलियन डॉलर और अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस में 310 मिलियन डॉलर का निवेश आ सकता है। MSCI ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस, लेंसकार्ट, लॉरस लैब्स और ग्रो (Groww) की पेरेंट कंपनी को शामिल किया गया है।


इंडेक्स वेटेज में फेरबदल

MSCI ने अगस्त 2026 की समीक्षा के तहत अदानी एंटरप्राइजेज, अदानी पोर्ट्स, अदानी पावर, स्विगी और जोमैटो (Eternal) जैसे शेयरों का वेटेज बढ़ाया है। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और डाबर/कॉलगेट-पामोलिव जैसी कंपनियों के वेटेज में कमी की गई है। पैसिव फंड्स और ईटीएफ (ETF) द्वारा अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने के कारण बाजार में तेज खरीदारी और बिकवाली का माहौल बना हुआ है।


वैश्विक कारणों से भारतीय बाजार पर दबाव

अदानी समूह के शेयरों में गिरावट व्यापक भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी के साथ आई। सेंसेक्स 307 अंक गिरकर 76,957 और निफ्टी 95 अंक घटकर 24,080 पर बंद हुआ। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने के संकेत और बॉंड यील्ड में वृद्धि से वैश्विक बाजारों में नरमी आई। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में 2% से अधिक की वृद्धि ने भी निवेशकों की चिंता को बढ़ा दिया।