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अनएकेडमी की बिक्री: भारतीय ऑनलाइन शिक्षा में बदलाव की कहानी

अनएकेडमी की हालिया बिक्री ने भारतीय ऑनलाइन शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाया है। हास्य कलाकार समय रैना के मजाक से शुरू हुई यह चर्चा, गौरव मुंजाल और उपग्रेड के बीच हुए सौदे की गहराई में जाकर भारतीय शिक्षा प्रौद्योगिकी के उतार-चढ़ाव को उजागर करती है। जानें कैसे अनएकेडमी ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और कोविड महामारी के बाद कैसे इसे चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इस लेख में अनएकेडमी की यात्रा, उसके प्रभाव और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की गई है।
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सोशल मीडिया पर मजाक और अनएकेडमी की बिक्री

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक हल्का-फुल्का मजाक भारतीय ऑनलाइन शिक्षा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण घटना की ओर ध्यान आकर्षित कर रहा है। हास्य कलाकार समय रैना ने अनएकेडमी के सह-संस्थापक गौरव मुंजाल को बधाई देते हुए चुटकी ली कि उन्होंने अपनी कंपनी को लगभग 20 करोड़ डॉलर में बेचा, जबकि कुछ साल पहले इसका मूल्य 340 करोड़ डॉलर से अधिक था। गौरव मुंजाल ने भी मजाक में कहा कि ऐसे दोस्तों के होते हुए दुश्मनों की क्या आवश्यकता है। इस बातचीत के पीछे भारतीय शिक्षा प्रौद्योगिकी उद्योग के उतार-चढ़ाव की एक बड़ी कहानी छिपी हुई है.


अनएकेडमी का अधिग्रहण

हालिया जानकारी के अनुसार, उपग्रेड ने अनएकेडमी का अधिग्रहण लगभग 20.6 करोड़ डॉलर में किया है। यह सौदा नकद भुगतान के बजाय पूरी तरह से शेयरों के आदान-प्रदान पर आधारित है, जिसका मतलब है कि अनएकेडमी के हिस्सेदारों को रकम के बदले उपग्रेड के शेयर मिले हैं। सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर है कि मौजूदा सौदे में कंपनी का मूल्यांकन 2021 के उच्चतम मूल्यांकन 344 करोड़ डॉलर से लगभग 94 प्रतिशत कम है.


अनएकेडमी की शुरुआत

अनएकेडमी की कहानी एक बड़े कारोबारी निवेश से नहीं, बल्कि गौरव मुंजाल के एक वीडियो चैनल से शुरू हुई थी। यह प्रयास 2010 में शुरू हुआ और पांच साल बाद एक व्यवस्थित ऑनलाइन शिक्षा मंच में बदल गया। गौरव मुंजाल के साथ रोमन सैनी और शिक्षक उद्यमी हेमेश सिंह इसके प्रमुख संस्थापकों में शामिल रहे.


रोमन सैनी की यात्रा

रोमन सैनी की यात्रा ने इस मंच को एक अलग पहचान दिलाई। उन्होंने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त की और 2013 की संघ लोक सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 18वां स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा छोड़कर शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का निर्णय लिया.


अनएकेडमी का विकास

उस समय, संघ लोक सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए महंगी कोचिंग पर निर्भरता काफी अधिक थी। अनएकेडमी ने इंटरनेट के माध्यम से मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराकर इस व्यवस्था को चुनौती दी। प्रारंभ में, मंच पर मुफ्त वीडियो के माध्यम से विभिन्न विषयों और परीक्षाओं की तैयारी कराई गई। धीरे-धीरे, बड़ी संख्या में शिक्षक इससे जुड़े और लंबे समय तक चलने वाली कक्षाओं के जरिए छात्रों को पढ़ाने लगे.


शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार

बाद में, कंपनी ने शुल्क आधारित कक्षाएं, पाठ्यक्रम, मार्गदर्शन और शिक्षकों से सीधे संवाद जैसी सेवाएं भी शुरू कीं। कई शिक्षक, जो वजिराम एंड रवि, विजन आईएएस और राउज आईएएस जैसे संस्थानों से जुड़े थे, अलग-अलग समय में इस मंच का हिस्सा बने. रोमन सैनी ने बताया कि शुरुआती दौर में इंटरनेट पर पढ़ाने के लिए अच्छे शिक्षकों को तैयार करना आसान नहीं था.


कोविड महामारी का प्रभाव

अनएकेडमी ने प्रतियोगी परीक्षाओं से आगे बढ़कर शिक्षा के व्यापक बाजार में अपनी जगह बनाने की कोशिश की। कोविड महामारी ने इस विस्तार को और गति दी। स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान बंद होने के कारण ऑनलाइन पढ़ाई एक प्रमुख विकल्प बन गई. कंपनी के अनुसार, उस समय हर महीने एक लाख से अधिक सीधी कक्षाएं होती थीं और लगभग दस लाख भुगतान करने वाले छात्र मंच से जुड़े थे.


शिक्षकों की लोकप्रियता

इस दौरान, अनएकेडमी से जुड़े शिक्षकों की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ी। शिक्षक अमित किल्होर के अनुसार, मंच ने शिक्षकों की कमाई और सामाजिक पहचान दोनों को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. मुफ्त मंच पर मौजूद वीडियो को अरबों बार देखा गया और कई शिक्षक देशभर में जाने-पहचाने चेहरे बन गए.


अनएकेडमी का विस्तार

कंपनी ने शिक्षा के क्षेत्र से बाहर भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश की। विराट कोहली, मैरी कॉम, शशि थरूर और किरण बेदी जैसी चर्चित हस्तियों के साथ विशेष कार्यक्रम किए गए. टेलीविजन फ्रेमवर्क के साथ मिलकर कोटा फैक्ट्री, एस्पिरेंट्स और संदीप भैया जैसी प्रस्तुतियों से जुड़ी साझेदारियां भी हुईं.


बदलते समय के साथ चुनौतियाँ

हालांकि, महामारी के बाद ऑनलाइन शिक्षा उद्योग का माहौल तेजी से बदल गया। छात्रों की बड़ी संख्या पारंपरिक कक्षाओं की ओर लौट गई और कंपनियों पर खर्च और लाभ के बीच संतुलन बनाने का दबाव बढ़ा. वर्ष 2021 में, अनएकेडमी ने लगभग 44 करोड़ डॉलर जुटाए थे और उसका मूल्यांकन 344 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया था. अब वही कंपनी लगभग 20.6 करोड़ डॉलर के सौदे तक पहुंच गई है.


गौरव मुंजाल की प्रतिक्रिया

गौरव मुंजाल ने मूल्यांकन में आई इस भारी गिरावट को स्वीकार किया है। उनका कहना है कि कंपनी ने ऊंचे मूल्यांकन के दौर में पूंजी जुटाई थी, लेकिन अब सौदा उस मूल्य के एक छोटे हिस्से पर हुआ है. इसके बावजूद, उन्होंने कंपनी की टीम द्वारा खड़े किए गए कारोबार पर गर्व जताया है.


भविष्य की संभावनाएँ

उपग्रेड के सह-संस्थापक रोनी स्क्रूवाला के अनुसार, दोनों कंपनियों के बीच बातचीत लगभग छह साल पहले शुरू हुई थी. मुंजाल के अनुसार, सौदे से पहले अनएकेडमी का कारोबार लगभग 400 करोड़ रुपये का था और कंपनी के पास लगभग 900 करोड़ रुपये की नकदी थी. उन्होंने यह भी दावा किया कि कंपनी के ज्यादातर कारोबार लाभ में थे या लाभ के करीब पहुंच चुके थे और यह सौदा किसी दबाव में नहीं किया गया.


अनएकेडमी का प्रभाव

यह ध्यान देने योग्य है कि किसी कंपनी का मूल्यांकन उसके पूरे प्रभाव को नहीं दर्शाता। अनएकेडमी ने भारत में ऑनलाइन शिक्षा को बड़े पैमाने पर लोकप्रिय बनाने के साथ-साथ शिक्षकों को एक नया डिजिटल मंच दिया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के पारंपरिक तरीके को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. आज उसका मूल्यांकन भले ही अपने शिखर से लगभग 94 प्रतिशत नीचे हो, लेकिन भारतीय शिक्षा प्रौद्योगिकी के विकास में अनएकेडमी की कहानी अब भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण है.