Newzfatafatlogo

अमित शाह ने लॉन्च किया FCRA 2.0 पोर्टल और e-OCI कार्ड, जानें इसके फायदे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने FCRA 2.0 पोर्टल और e-OCI कार्ड का उद्घाटन किया, जिससे OCI कार्डधारकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी। यह नई प्रणाली विदेशी अंशदान की प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और तेज बनाएगी। FCRA 2.0 को एक गेमचेंजर माना जा रहा है, क्योंकि यह विदेशी फंड के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान करता है। हालांकि, विपक्ष ने इन नियमों की आलोचना की है, यह कहते हुए कि इससे सिविल सोसाइटी संगठनों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा। जानें इस नई पहल के सभी पहलुओं के बारे में।
 | 

नई डिजिटल सुविधाओं का आगाज़

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को FCRA 2.0 पोर्टल और e-OCI कार्ड का उद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि ये नई डिजिटल सेवाएं 50 लाख से अधिक OCI (ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया) कार्डधारकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करेंगी। इसके साथ ही, विदेशी अंशदान (FCRA) से संबंधित प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और तेज होंगी। शाह ने कहा कि 2014 से पहले FCRA की प्रक्रिया कागजी कार्यवाही में उलझी हुई थी, लेकिन अब तकनीक के माध्यम से इसे अधिक प्रभावी बनाया गया है। FCRA 2.0 पोर्टल के जरिए कागजी कार्यवाही में कमी आएगी, आवेदनों का निपटारा तेजी से होगा और विदेशी अंशदान की रियल टाइम निगरानी संभव होगी। दस्तावेज अब भौतिक रूप से जमा नहीं होंगे, जिससे वैध संस्थाओं को सुविधा मिलेगी और गलत उद्देश्यों से आने वाले विदेशी फंड पर प्रभावी नजर रखी जा सकेगी। वहीं, e-OCI कार्ड के माध्यम से विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को सेवाएं सरल और डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगी। 


FCRA 2.0 का महत्व

FCRA 2.0 को गेमचेंजर क्यों माना जा रहा है

एफसीआरए (FCRA) 2.0 को एक 'गेमचेंजर' कहा जा रहा है क्योंकि यह विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 के लागू होने के बाद विदेशी फंड के उपयोग के लिए एक स्पष्ट और कड़ा ढांचा तैयार करता है। इस नए नियम के तहत पहली बार उन धार्मिक गतिविधियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है जिनके लिए विदेशी चंदा लिया जा सकता है, जैसे पूजा स्थलों का रखरखाव, धार्मिक ग्रंथों का अनुवाद, तीर्थयात्रियों की सुविधाएं, लंगर-धर्मशालाएं और आदिवासी परंपराओं का संरक्षण। हालांकि, विदेशी फंड के जरिए धार्मिक परिवर्तन (धर्मांतरण) या प्रचार-प्रसार पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके अतिरिक्त, पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ट्रस्टियों और डायरेक्टरों को "मुख्य पदाधिकारी" के दायरे में लाकर उनकी जवाबदेही तय की गई है। अब विदेशी नागरिकों (भारतीय मूल के लोगों को छोड़कर) के मुख्य पदों पर रहने वाले एनजीओ को विशेष अनुमति के बिना पंजीकरण नहीं मिलेगा। इसके साथ ही, वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए संगठनों को अगली किस्त पाने से पहले पिछले फंड का कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा खर्च करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे केंद्र सरकार के अनुसार सिस्टम की कमियां दूर होंगी, वित्तीय जवाबदेही मजबूत होगी और पूरा ढांचा पूरी तरह तकनीक-आधारित हो जाएगा।


विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्ष की आपत्ति

विपक्षी दलों ने FCRA के नए नियमों की आलोचना की है, यह कहते हुए कि इससे सिविल सोसाइटी संगठनों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा। कई विपक्षी नेताओं ने इन बदलावों को वापस लेने की मांग की है। उनका तर्क है कि "मुख्य पदाधिकारी" (key functionary) की व्यापक परिभाषा, पात्रता के कड़े नियम और अनुपालन (compliance) की सख्त शर्तें शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय क्षेत्रों में काम करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), चैरिटी और स्वयंसेवी समूहों के कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। आलोचकों ने उस प्रावधान पर भी सवाल उठाए हैं जिसके तहत NGOs को अगली किश्त पाने से पहले मौजूदा विदेशी फंड का 75 प्रतिशत हिस्सा खर्च करना होगा। उनका कहना है कि इससे दीर्घकालिक विकास परियोजनाओं पर काम करने वाले संगठनों के लिए समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उनका मानना है कि इन बदलावों से प्रशासनिक निगरानी बढ़ेगी और सिविल सोसाइटी संगठनों के लिए कार्य करने का दायरा सीमित हो सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि इन सुधारों का उद्देश्य पारदर्शिता को बढ़ावा देना, विदेशी योगदान का जिम्मेदारी से उपयोग सुनिश्चित करना और विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को रोकना है, साथ ही डिजिटलाइजेशन के माध्यम से नियमों का पालन करना आसान बनाना है।