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अमेरिका-ईरान वार्ता से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना

अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की संभावित समझौते से कीमतों में गिरावट आ सकती है। निवेशकों की नजर ओपेक और आईईए की रिपोर्टों पर रहेगी। जानें इस विषय पर और क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ।
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कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते अगले सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए संभावित समझौते से कीमतों में थोड़ी गिरावट भी आ सकती है, ऐसा विश्लेषकों का मानना है।


निवेशकों की नजर महत्वपूर्ण रिपोर्टों पर

विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों की निगाहें पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की मासिक तेल बाजार रिपोर्ट के साथ-साथ अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान (एपीआई) द्वारा जारी साप्ताहिक भंडार आंकड़ों पर भी रहेंगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में कहा कि रियाद के हवाई अड्डे पर हमले के बाद अमेरिका, यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई में शामिल होने पर विचार कर रहा है, जिससे क्षेत्र में भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ गई है।


ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के जिंस शोध प्रमुख नवनीत दमानी ने बताया कि संघर्ष के बढ़ने से क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसमें बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी शामिल है। पिछले सप्ताह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अक्टूबर में आपूर्ति वाले कच्चे तेल के वायदा भाव में 35 रुपये यानी 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जो 8,881 रुपये प्रति बैरल पर बंद हुआ।


कच्चे तेल की कीमतों में संभावित गिरावट

हालांकि, नवंबर अनुबंध में 82 रुपये यानी लगभग एक प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे यह 8,828 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया। दमानी ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें कूटनीतिक उम्मीदों और वास्तविक आपूर्ति में जोखिमों के बीच झूल रही हैं। युद्ध से पहले के 6,500 रुपये प्रति बैरल के स्तर की तुलना में, एमसीएक्स पर कच्चे तेल का 8,500 रुपये से ऊपर रहना यह दर्शाता है कि कीमतों में आपूर्ति जोखिम का बड़ा प्रीमियम अब भी शामिल है।


भविष्य की संभावनाएं

उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका के प्रस्ताव पर ईरान सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है, तो निकट भविष्य में कीमतों में और गिरावट संभव है। हालांकि, पिछले अनुभवों से यह स्पष्ट है कि केवल कूटनीतिक प्रगति से आपूर्ति में लंबे समय तक सुधार नहीं होता। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और अमेरिका मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर सैन्य हमला नहीं करेगा।


वैश्विक बाजारों पर प्रभाव

रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा कि अमेरिका-ईरान कूटनीतिक बातचीत और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े घटनाक्रम वैश्विक बाजारों के लिए महत्वपूर्ण बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दिशा में प्रगति से ऊर्जा की कीमतें घट सकती हैं, जिससे भारत के आयात बिल और रुपये को कुछ राहत मिल सकती है।


भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव

हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव में वृद्धि से बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।