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अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर 10% शुल्क का प्रभाव: निर्यातकों की राय

अमेरिका ने भारत से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया है, जिससे भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे। निर्यातकों का मानना है कि इसका प्रभाव वैश्विक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में समझा जाना चाहिए। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ ने इस शुल्क के प्रभाव का आकलन करने के लिए सलाह दी है कि निर्यातक विभिन्न उत्पादों के लिए अमेरिकी शुल्क और प्रतिस्पर्धी देशों की दरों का ध्यान रखें। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है।
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अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क का प्रभाव

अमेरिका द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाने से भारतीय उत्पादों की कीमतें अमेरिकी बाजार में बढ़ जाएंगी। हालांकि, निर्यातकों का मानना है कि इस शुल्क का प्रभाव केवल घोषित दरों के आधार पर नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में समझा जाना चाहिए। अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी के खिलाफ कदम उठाते हुए भारत समेत 17 देशों से आने वाले सामान पर यह शुल्क लगाया है।


भारतीय निर्यात संगठनों की प्रतिक्रिया

भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) ने कहा कि इस अतिरिक्त शुल्क से भारतीय उत्पादों की लागत में वृद्धि होगी, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव प्रतिस्पर्धी देशों की स्थिति के साथ तुलना करके समझा जाना चाहिए। फियो के अध्यक्ष एस.सी. राल्हन ने बताया कि भारत को 10 प्रतिशत के निचले शुल्क वर्ग में रखा गया है, जबकि चीन, वियतनाम, थाईलैंड, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों पर 12.5 प्रतिशत का शुल्क लगाया गया है।


भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता

इस प्रकार, भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर मानी जा रही है। राल्हन ने कहा कि वस्त्र, परिधान, चमड़ा और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में बांग्लादेश, कंबोडिया, पाकिस्तान, श्रीलंका, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे कई प्रतिद्वंद्वी देश भी 10 प्रतिशत शुल्क के दायरे में आते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनी रहेगी। फियो ने निर्यातकों को सलाह दी है कि वे केवल 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क के आधार पर निष्कर्ष न निकालें, बल्कि विभिन्न उत्पादों के लिए अमेरिकी शुल्क, संभावित छूट और प्रतिस्पर्धी देशों पर लागू दरों का विस्तृत आकलन करें।