अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि की
नई दिल्ली में फेडरल रिजर्व का महत्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने हाल ही में अपनी दो दिवसीय बैठक के बाद ब्याज दरों में वृद्धि का निर्णय लिया है। केंद्रीय बैंक ने फेडरल फंड्स रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है, जिससे यह 3.75 से बढ़कर 4 प्रतिशत हो गया है। यह 2023 के बाद पहली बार है जब दरों में वृद्धि की गई है।
ब्याज दरों में वृद्धि का कारण
2023 के बाद पहली बार बढ़ीं ब्याज दरें
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि का समर्थन किया। 12 सदस्यों ने इस निर्णय का समर्थन किया। फेड के अनुसार, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आर्थिक गतिविधियाँ मजबूत बनी हुई हैं और घरेलू खर्च में भी वृद्धि देखी जा रही है। इस स्थिति में, केंद्रीय बैंक का मुख्य ध्यान कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखना है।
महंगाई की चुनौतियाँ
महंगाई अभी भी फेड के लक्ष्य से ऊपर
फेड के सामने महंगाई एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अगस्त में अमेरिका की उपभोक्ता महंगाई दर 3.4 प्रतिशत रही, जो जुलाई के समान स्तर पर है। हालांकि, मासिक आधार पर इसमें कोई वृद्धि नहीं हुई, लेकिन यह फेड के 2 प्रतिशत के दीर्घकालिक लक्ष्य से काफी ऊपर है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि मजबूत मांग के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
महंगाई के कारण
एनर्जी और टैरिफ ने बढ़ाई चिंता
महंगाई के पीछे कई कारण हैं। मध्य पूर्व में तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में वृद्धि हुई है, जिसका व्यापक कीमतों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, अमेरिका की टैरिफ नीतियाँ और मजबूत घरेलू मांग भी महंगाई को प्रभावित कर रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का एक कारण हैं।
भारत पर संभावित प्रभाव
भारत पर भी पड़ सकता है असर
अमेरिकी ब्याज दरों में वृद्धि का प्रभाव वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारत पर भी पड़ सकता है। ऊंची अमेरिकी दरें निवेशकों को डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित कर सकती हैं, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश पर दबाव बन सकता है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार और रुपये की विनिमय दर पर भी पड़ सकता है।
