अल नीनो का प्रभाव: एशिया-प्रशांत की अर्थव्यवस्थाओं पर संभावित खतरे
अर्थव्यवस्था पर अल नीनो का प्रभाव
नई दिल्ली, 9 अगस्त - एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाएं, विशेषकर भारत, वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस, बढ़ती कीमतों के बीच मौसम से संबंधित आपूर्ति झटकों के प्रति संवेदनशील बनी हुई हैं। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार, 2026 में शुरू होने वाला अल नीनो इस क्षेत्र में कमजोर बारिश और जलवायु संबंधी व्यवधानों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इसका व्यापक आर्थिक प्रभाव वर्तमान में प्रबंधन के दायरे में रहने की उम्मीद है।
एसएंडपी ने बताया कि अल नीनो के प्रमुख प्रभावों में कृषि उत्पादन में कमी, खाद्य महंगाई में वृद्धि, जलविद्युत उत्पादन में गिरावट और वनों में आग तथा धुंध जैसी घटनाएं शामिल हैं। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया उन क्षेत्रों में हैं, जहां अल नीनो का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल सकता है। भारत के संदर्भ में, जुलाई 2026 तक उपलब्ध खाद्य और अनाज भंडार संभावित खाद्य आपूर्ति झटकों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, फसल नुकसान को कम करने के लिए अधिकारियों द्वारा किसानों के साथ जिला स्तर पर समन्वय किया जा रहा है। एसएंडपी के अनुसार, कई एशियाई देशों ने खाद्य भंडार बढ़ाने, आयात की बेहतर योजना बनाने और बाजार प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने जैसे कदम उठाए हैं। जलाशयों के बेहतर प्रबंधन और सिंचाई ढांचे में निवेश से कम बारिश की अवधि में इन देशों की जुझारू क्षमता में वृद्धि हुई है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने पिछले महीने कहा था कि मजबूत अल नीनो परिस्थितियां विकसित हो रही हैं और अगस्त से अक्टूबर के बीच इनकी और मजबूती की संभावना है। इससे दुनिया के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान और मौसम की गंभीर घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। एसएंडपी ने कहा कि कृषि पर अधिक निर्भर अर्थव्यवस्थाएं और खाद्य पदार्थों के लिए अधिक आयात या कृषि उत्पादन पर निर्भर उपभोक्ता अल नीनो के गंभीर प्रभाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील होंगे।
हालांकि, क्षेत्र में कृषि की अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी धीरे-धीरे घट रही है, जिससे कुछ हद तक जोखिम कम हुआ है। इसके बाद कम जलविद्युत उत्पादन को सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव माना गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी पिछले सप्ताह कहा था कि अल नीनो की परिस्थितियों के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी और असमान बारिश कृषि क्षेत्र के परिदृश्य तथा ग्रामीण मांग के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई दर पांच प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
