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आईएमएफ का वैश्विक आर्थिक वृद्धि का अनुमान: 3.1 प्रतिशत की सुस्ती

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को 3.1 प्रतिशत पर स्थिर रहने का अनुमान लगाया है। रिपोर्ट में अमेरिका की आर्थिक स्थिति, कृत्रिम मेधा का प्रभाव, और भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर चर्चा की गई है। जानें कि कैसे वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में असमानता बढ़ रही है और एआई का रोजगार पर क्या असर पड़ सकता है।
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आईएमएफ की नई रिपोर्ट पर नजर

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने इस वर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि का अनुमान थोड़ा बढ़ाया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि वृद्धि दर 3.1 प्रतिशत के स्तर पर सुस्त रहने की संभावना है। जुलाई में, आईएमएफ ने वैश्विक वृद्धि दर को तीन प्रतिशत के आसपास रहने का पूर्वानुमान लगाया था। वर्ष 2025 में, वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 3.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।


अमेरिका की आर्थिक स्थिति

आईएमएफ के मंगलवार को जारी आर्थिक परिदृश्य के अनुसार, अमेरिका की आर्थिक वृद्धि 2026 और 2027 में 2.3 प्रतिशत पर स्थिर रहने का अनुमान है। आईएमएफ ने यह भी बताया कि इस साल तेल की कीमतों में लगभग 41 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है, जिससे औसत तेल मूल्य 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इससे वैश्विक महंगाई दर 2026 में बढ़कर 4.7 प्रतिशत हो सकती है, जो पिछले वर्ष 4.1 प्रतिशत थी।


कृत्रिम मेधा का प्रभाव

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कृत्रिम मेधा (एआई) के क्षेत्र में हो रहे विकास से तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि के प्रभाव को संतुलित किया जा रहा है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र के नेता आईएमएफ और विश्व बैंक की शरदकालीन बैठकों के लिए बैंकॉक में एकत्रित हो रहे हैं। हालांकि, एआई क्षेत्र का लाभ सभी देशों को समान रूप से नहीं मिल रहा है।


आर्थिक असमानता

कंप्यूटर चिप और एआई से संबंधित उपकरणों की मांग में अमेरिका और चीन की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से अधिक है। आईएमएफ की शोध निदेशक सिलवाना टेनरेरो ने संवाददाताओं से कहा, "आर्थिक परिदृश्य में काफी असमानता है।" रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्थिक वृद्धि कुछ देशों में अधिक केंद्रित होती जा रही है। वर्तमान में, 32 देश वैश्विक वृद्धि में 95 प्रतिशत योगदान दे रहे हैं, जबकि अप्रैल में यह संख्या 54 थी।


भविष्य की चुनौतियाँ

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की गति केवल धीमी या तेज नहीं हो रही है, बल्कि युद्ध के कारण आपूर्ति में आए झटकों और एआई से जुड़ी मजबूत मांग के प्रभाव के आधार पर विभिन्न देशों के बीच वृद्धि का वितरण बदल रहा है। बैंकॉक में हो रही बैठकों में एआई का रोजगार पर प्रभाव भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि "यह एक सुनामी की तरह है, जो धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है।"


भारत की आर्थिक स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, विकसित अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर इस साल मामूली बढ़कर 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। आईएमएफ ने भारत को फिर से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में मान्यता दी है। भारत की वृद्धि दर इस वर्ष 7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष की 7.7 प्रतिशत की वृद्धि से कम है।


बैठकों का उद्देश्य

बैंकॉक में हो रही बैठकों में वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन करेंगे और वित्तीय स्थिरता तथा सतत वृद्धि को समर्थन देने की रणनीतियों पर चर्चा करेंगे।