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आईओसी की नई रणनीति: कच्चे तेल और गैस की ढुलाई के लिए जहाज खरीदने की योजना

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) ने कच्चे तेल और रसोई गैस की ढुलाई के लिए जहाज खरीदने की योजना बनाई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों में रुकावटों के चलते कंपनी ने अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने का निर्णय लिया है। वित्त निदेशक अनुज जैन ने बताया कि कंपनी ने जहाजों की खरीद के लिए मंजूरी दे दी है और विभिन्न देशों से तेल खरीदने की रणनीतियों को भी लागू किया है। जानें कैसे ये कदम आईओसी की भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
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आईओसी का जहाज खरीदने का निर्णय

भारत की प्रमुख तेल रिफाइनरी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) अब कच्चे तेल और रसोई गैस की ढुलाई के लिए अपने जहाजों की खरीदारी करने की योजना बना रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री मार्गों में आ रही बाधाओं ने भारत की तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके साथ ही समुद्री परिवहन की लागत भी काफी बढ़ गई है। ऐसे में कंपनी अब तेल खरीदने के साथ-साथ उसकी ढुलाई पर भी नियंत्रण मजबूत करना चाहती है।


कंपनी की योजनाएं और निविदाएं

कंपनी के वित्त निदेशक अनुज जैन ने दूसरी तिमाही के परिणामों पर चर्चा करते हुए बताया कि निदेशक मंडल ने कुछ जहाजों की खरीद के लिए मंजूरी दे दी है। इसके लिए निविदाएं पहले ही जारी की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए देश की तेल कंपनियों को समुद्री परिवहन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। आईओसी देश में जहाज निर्माण की संभावनाएं भी तलाश रही है, जो केंद्र सरकार की 'मेक इन इंडिया' योजना के तहत किया जा सकता है।


किराए पर जहाजों का उपयोग

अब तक, आईओसी मुख्य रूप से तेल और गैस की ढुलाई के लिए किराए पर जहाजों का उपयोग करती रही है। इनमें कुछ जहाज निश्चित समय के लिए किराए पर लिए जाते हैं, जबकि कुछ एक यात्रा के लिए। वर्तमान में, कंपनी तीन विकल्पों पर विचार कर रही है: मौजूदा किराए की व्यवस्था को सुधारना, अपने जहाज खरीदना और देश में जहाज निर्माण को बढ़ावा देना।


कच्चे तेल और गैस की ढुलाई की लागत

वर्तमान में, कंपनी ने 3 कच्चे तेल के जहाज और 9 रसोई गैस के जहाज किराए पर ले रखे हैं। अनुज जैन के अनुसार, इस व्यवस्था से संकट के समय कंपनी को काफी बचत हुई है। कच्चे तेल की ढुलाई पर प्रति बैरल खर्च 2 से 2.50 डॉलर है, जबकि खुले बाजार में यह 8 से 10 डॉलर तक पहुंच गया है। इसी तरह, रसोई गैस की ढुलाई का सामान्य किराया 40 डॉलर प्रति टन है, जबकि खुले बाजार में यह 160 से 180 डॉलर प्रति टन हो गया है।


वैश्विक तेल आपूर्ति पर प्रभाव

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से आने वाले तेल और गैस का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यहां तनाव बढ़ने पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, जिससे बीमा और माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए ऐसे हालात का सीधा असर उसकी ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।


आईओसी की खरीदारी रणनीति

आईओसी ने तेल खरीदने के लिए विभिन्न देशों पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया है। अनुज जैन के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कंपनी ने अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 55 प्रतिशत रूस से खरीदा। वहीं, पश्चिम एशिया से 24 प्रतिशत, अफ्रीका से 10 प्रतिशत, ब्राजील से 7 प्रतिशत, अमेरिका से 2 से 5 प्रतिशत और वेनेजुएला से 3 से 4 प्रतिशत तेल मंगाया गया।


बाजार से सीधे तेल खरीदने की प्रक्रिया

कंपनी ने बाजार से सीधे तेल खरीदने की प्रक्रिया को भी बढ़ाया है। पहली छमाही में कुल तेल खरीद का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा खुले बाजार से आया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा लगभग 50 प्रतिशत था। कंपनी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद वह तेल की खरीद में बेहतर कीमत हासिल करने में सफल रही है।


आईओसी का मुनाफा और भंडार

आईओसी ने सितंबर तिमाही में 21,630 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। पिछले तिमाही में उसे 2,661 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। कंपनी के अनुसार, भंडार में कीमतों के बदलाव से हुए फायदे और विभिन्न कारोबार में बेहतर प्रदर्शन ने मुनाफा बढ़ाने में मदद की। इस दौरान, कंपनी का प्रति बैरल सकल रिफाइनिंग मार्जिन 18.52 डॉलर रहा।


भविष्य की चुनौतियाँ

अनुज जैन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में होने वाले बदलाव अब भी कंपनी के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। इनका असर तेल की खरीद, जहाजों के किराए और पेट्रोल-डीजल की बिक्री से होने वाली कमाई पर पड़ सकता है। इसलिए, अपने जहाज खरीदने और भारत में जहाज बनाने की योजना का उद्देश्य केवल खर्च कम करना नहीं, बल्कि बाहरी संकट के दौरान देश की तेल और गैस आपूर्ति को बनाए रखना भी है।