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आईटी कंपनियों की तिमाही वृद्धि में सुस्ती, ग्राहक खर्च पर नजर

देश की प्रमुख आईटी कंपनियों की जुलाई-सितंबर तिमाही में राजस्व वृद्धि सुस्त रहने की संभावना है। ग्राहक विवेकाधीन खर्च को सीमित रख रहे हैं, जिससे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मजबूत बुकिंग कितनी तेजी से राजस्व में परिवर्तित होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 12-18 महीनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया लंबी रहेगी। जानें इस विषय पर और क्या कह रहे हैं विश्लेषक और कंपनियों के सीईओ।
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आईटी कंपनियों की राजस्व वृद्धि पर नजर

नई दिल्ली, चार अक्टूबर: देश की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के लिए जुलाई-सितंबर तिमाही में राजस्व वृद्धि धीमी रहने की संभावना है, जबकि मार्जिन लगभग स्थिर रहने का अनुमान है। विश्लेषकों का मानना है कि ग्राहक विवेकाधीन खर्च को सीमित रख रहे हैं, जिससे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मजबूत बुकिंग कितनी तेजी से राजस्व में परिवर्तित होती है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पारंपरिक सेवाओं की मांग को किस हद तक प्रभावित करती है। शोध सलाहकार कंपनी अर्नअर्थइनसाइट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में पांच प्रमुख आईटी कंपनियों की तिमाही आधार पर वृद्धि 0.5-1 प्रतिशत रहने की संभावना है।


ग्राहकों के बजट में सुधार की कमी

अर्नअर्थइनसाइट के संस्थापक और सीईओ गौरव वासु ने कहा, "दूसरी तिमाही पहली तिमाही से बेहतर नहीं होगी, क्योंकि हमें ग्राहकों के बजट या खर्च में कोई सुधार नहीं दिख रहा है।" भू-राजनीतिक तनाव के कारण विवेकाधीन खर्च में कमी आई है और निर्णय लेने में समय लग रहा है। गार्टनर के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही पिछली तिमाही की तुलना में कुछ बेहतर हो सकती है।


बाजार की स्थिति और विवेकाधीन खर्च

गार्टनर के वरिष्ठ विश्लेषक बिस्वजीत मैती ने कहा, "हालांकि, बाजार की स्थितियां सामान्य बनी हुई हैं। विवेकाधीन खर्च में सावधानी और उत्पादकता पर ध्यान देने से खरीद संबंधी निर्णय प्रभावित हो रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा बाजार रुझानों के आधार पर प्रमुख आईटी सेवा प्रदाताओं की वृद्धि सीमित रहने की संभावना है।


कंपनियों की बुकिंग और राजस्व में बदलाव

वासु ने बताया कि कंपनियों की बुकिंग मजबूत बनी रहेगी, लेकिन इसे राजस्व में बदलने में अधिक समय लगेगा। अगले 12-18 महीनों में ग्राहकों के निर्णय लेने की प्रक्रिया लंबी रहने की उम्मीद है। दूसरी तिमाही के परिणामों की शुरुआत टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) 8 अक्टूबर को करेगी, जबकि एचसीएलटेक 12 अक्टूबर और इन्फोसिस 23 अक्टूबर को अपने परिणाम घोषित करेगी।


वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वृद्धि अनुमान

वासु ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कंपनियों के वृद्धि अनुमान में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। हालांकि, कुछ कंपनियां अपने अनुमान की ऊपरी सीमा में लगभग 0.5 प्रतिशत की वृद्धि कर सकती हैं। अर्नअर्थइनसाइट ने प्रमुख कंपनियों की पूरे वित्त वर्ष की वृद्धि का अनुमान 3 से 4 प्रतिशत पर बनाए रखा है।


विलय एवं अधिग्रहण का प्रभाव

इसमें बड़ी हिस्सेदारी मांग में सुधार के बजाय विलय एवं अधिग्रहण से होने वाली वृद्धि की होगी। वासु ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग ने 14 विलय एवं अधिग्रहण सौदों पर 3.6 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए हैं। कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बना रहेगा।


मार्जिन और वेतन वृद्धि

हाल ही में वेतन वृद्धि का असर समाहित हुआ है और सौदे हासिल करने के लिए एआई मंचों तथा साझेदारियों में निवेश करना पड़ रहा है। एआई से होने वाली दक्षता बढ़ोतरी का लाभ भी ग्राहकों को दिया जा रहा है। वासु ने कहा, "मार्जिन के लिए वास्तविक सहारा केवल सेवाएं बेचने के बजाय एप्लिकेशन और मंच बेचने से मिलेगा।"


मध्यम आकार की कंपनियों की स्थिति

अर्नअर्थइनसाइट को टीसीएस, इन्फोसिस और एचसीएलटेक जैसी कुछ बड़ी कंपनियों के मार्जिन में मामूली सुधार की उम्मीद है। वहीं, मध्यम आकार की कंपनियों के मौजूदा मार्जिन को बनाए रखने का अनुमान है, हालांकि उन्हें विलय एवं अधिग्रहण के बाद कंपनियों को एकीकृत करने की लागत भी उठानी होगी।


ग्राहकों की सतर्कता

मैती ने कहा कि ग्राहक प्रौद्योगिकी पर खर्च को लेकर सतर्क हैं और ऐसे कार्यक्रमों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो कारोबार को स्पष्ट लाभ, लागत में कमी और जोखिम में कमी प्रदान करें। उन्होंने कहा, "अधिकांश संगठन अभी भी निवेश के फैसले चुनिंदा तरीके से ले रहे हैं और स्पष्ट निवेश पर प्रतिफल, उत्पादकता बढ़ोतरी तथा परिचालन मजबूती वाले कार्यक्रमों पर ध्यान दे रहे हैं।"


बैंकिंग और खुदरा क्षेत्र पर दबाव

इसलिए खर्च में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, लेकिन कुल मांग का माहौल अभी पूरी तरह सुधरा नहीं है। वासु ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र दबाव में है। मुद्रास्फीति में कमी नहीं आने के कारण खुदरा और विनिर्माण क्षेत्र भी दबाव में हैं। उन्होंने अमेरिका को सबसे कमजोर बाजार बताया।