आईटी क्षेत्र में शेयर बाजार में गिरावट: निवेशकों की मुनाफावसूली का असर
बुधवार को शेयर बाजार में आईटी क्षेत्र के लिए दबाव भरा सत्र रहा, जिसमें प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई। टीसीएस, इंफोसिस और टेक महिंद्रा जैसे बड़े नामों में बिकवाली का दबाव देखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मुनाफावसूली के कारण यह गिरावट आई है। हालांकि, दीर्घकालिक संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं, खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में। जानें इस स्थिति का विस्तृत विश्लेषण।
| Jun 3, 2026, 20:01 IST
बाजार में आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट
बुधवार को शेयर बाजार में आईटी क्षेत्र के लिए कारोबारी सत्र काफी चुनौतीपूर्ण रहा। जैसे ही बाजार खुला, देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। टीसीएस, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, एलटीएम और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स जैसे बड़े नामों में बिकवाली का दबाव रहा, जिसके कारण निफ्टी आईटी सूचकांक में लगभग 6 प्रतिशत की कमी आई।
निफ्टी आईटी सूचकांक में गिरावट
जानकारी के अनुसार, निफ्टी आईटी सूचकांक कारोबार के दौरान 1,815 अंकों की गिरावट के साथ 29,301 अंक पर पहुंच गया। इससे पहले यह सूचकांक 31,116 अंक पर बंद हुआ था। बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में आईटी शेयरों में आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे यह गिरावट आई।
मंगलवार की तेजी का उलटफेर
मंगलवार को भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी देखी गई थी। उस समय वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के सकारात्मक वित्तीय परिणामों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रति सकारात्मक माहौल ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया था। अमेरिकी बाजारों में तकनीकी शेयरों की मजबूती का प्रभाव भारतीय बाजार पर भी पड़ा था। हालांकि, अगले कारोबारी दिन निवेशकों ने अपने लाभ को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली शुरू कर दी।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली भी आईटी क्षेत्र पर दबाव डाल रही है। बताया गया है कि मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से 8,362 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की। चूंकि विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी बड़ी आईटी कंपनियों में काफी अधिक होती है, इसलिए उनकी बिकवाली का सीधा असर इन शेयरों पर दिखाई देता है।
प्रमुख शेयरों में गिरावट
प्रमुख शेयरों की बात करें तो टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखा गया। कंपनी का शेयर 8 प्रतिशत से अधिक गिरकर 2,246 रुपये के आसपास पहुंच गया। वर्ष 2026 में अब तक यह शेयर लगभग 30 प्रतिशत कमजोर हो चुका है।
अन्य आईटी कंपनियों की स्थिति
इंफोसिस के शेयरों में भी लगभग 3.5 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे यह 1,227 रुपये के स्तर तक फिसल गया। वहीं, टेक महिंद्रा के शेयर करीब 5 प्रतिशत गिरकर 1,492 रुपये के आसपास कारोबार करते नजर आए। इसके अलावा, एलटीएम के शेयरों में 7 प्रतिशत से अधिक और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयरों में 5 प्रतिशत से ज्यादा की कमजोरी देखी गई। यह गिरावट दर्शाती है कि पूरे आईटी क्षेत्र में व्यापक स्तर पर बिकवाली हुई है।
दीर्घकालिक संभावनाएं
हालांकि, तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय आईटी कंपनियों के पास कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल इंजीनियरिंग और तकनीकी सेवाओं से जुड़े बड़े सौदे मौजूद हैं। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी इन कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, क्योंकि उनकी बड़ी आय विदेशी ग्राहकों से डॉलर में आती है।
निवेशकों की नजर
कमजोर रुपया निर्यात आधारित कंपनियों के लाभ को बढ़ाने में मदद करता है। यही कारण है कि अल्पकालिक दबाव के बावजूद कई विश्लेषक आईटी क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाओं को सकारात्मक मान रहे हैं। फिलहाल, निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों, विदेशी निवेश प्रवाह और आईटी कंपनियों के आगामी व्यावसायिक सौदों पर बनी हुई है।
