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आईटीआर रिफंड में कटौती: जानें कारण और समाधान

आईटीआर दाखिल करने के बाद रिफंड का इंतजार करने वाले करदाताओं के लिए यह जानना आवश्यक है कि कई बार पुराने टैक्स बकाये के कारण रिफंड में कटौती हो सकती है। इस लेख में, हम समझेंगे कि कैसे आयकर विभाग पुराने बकाये को समायोजित कर सकता है और नोटिस मिलने पर करदाता को क्या कदम उठाने चाहिए। सही जानकारी और समय पर कार्रवाई से आप अपने रिफंड को सुरक्षित रख सकते हैं।
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आईटीआर दाखिल करने के बाद रिफंड का इंतजार


करदाता अक्सर आईटीआर दाखिल करने के बाद अपने रिफंड का बेसब्री से इंतजार करते हैं। हालांकि, कई बार उनके खाते में राशि आने से पहले ही कटौती हो जाती है। इसका मुख्य कारण पुराने टैक्स बकाये का समायोजन होता है। ऐसे मामलों में आयकर विभाग नोटिस भेजकर करदाता को जवाब देने का अवसर प्रदान करता है।


पुराने बकाये के कारण रिफंड में कटौती

असेसमेंट वर्ष 2026-27 के लिए रिटर्न दाखिल होने के बाद आयकर विभाग सभी दावों की जांच कर रहा है। यदि किसी करदाता के पिछले किसी असेसमेंट वर्ष का टैक्स बकाया पाया जाता है, तो आयकर अधिनियम की धारा 245 के तहत मौजूदा रिफंड को उस बकाये से समायोजित किया जा सकता है। कई बार यह बकाया वास्तविक होता है, जबकि कुछ मामलों में टैक्स क्रेडिट, चालान अपडेट या रिकॉर्ड संबंधी त्रुटियों के कारण भी ऐसा हो सकता है। इसलिए नोटिस मिलने पर उसकी पूरी जानकारी की जांच करना आवश्यक है।


नोटिस मिलने पर क्या करें?

यदि आयकर विभाग से टैक्स डिमांड का नोटिस प्राप्त होता है, तो करदाता ई-फाइलिंग पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जवाब दे सकता है। यदि बकाया सही है, तो उसका भुगतान किया जा सकता है। यदि टैक्स पहले ही जमा किया गया है, तो चालान नंबर, बीएसआर कोड और भुगतान का विवरण अपलोड करना होगा। यदि डिमांड गलत लगती है, तो संबंधित दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आपत्ति दर्ज की जा सकती है। जवाब जमा करने के बाद रसीद और ट्रांजैक्शन आईडी को सुरक्षित रखना भी आवश्यक है।


रिफंड पर प्रभाव

पुराने टैक्स बकाये का रिफंड की राशि पर सीधा प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी करदाता का 25,000 रुपये का रिफंड बनता है और पुराने रिकॉर्ड में 10,000 रुपये की टैक्स देनदारी है, तो विभाग पहले उस बकाये को समायोजित करेगा और शेष राशि ही खाते में भेजी जाएगी। यदि बकाया रिफंड से अधिक है, तो पूरा रिफंड भी समायोजित किया जा सकता है। इसलिए रिफंड की स्थिति को नियमित रूप से जांचना और नोटिस का समय पर जवाब देना अत्यंत महत्वपूर्ण है।


महत्वपूर्ण तिथियाँ और सावधानियाँ

31 जुलाई 2026 की सामान्य आईटीआर समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, जबकि बिलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर 2026 तक दाखिल किया जा सकता है। संशोधित रिटर्न 31 मार्च 2027 तक और अपडेटेड रिटर्न निर्धारित नियमों के अनुसार बाद में भी दाखिल किए जा सकते हैं। करदाताओं को केवल आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल का उपयोग करना चाहिए और किसी अनजान लिंक या कॉल पर अपनी बैंक जानकारी, पैन, ओटीपी या पासवर्ड साझा नहीं करना चाहिए। ई-प्रोसीडिंग्स और पेंडिंग एक्शन की नियमित जांच भविष्य की परेशानियों से बचा सकती है।