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आईडीबीआई बैंक के पुनर्गठन से विदेशी निवेश को मिलेगा बढ़ावा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन को मंजूरी देने की घोषणा की है, जिससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। यह कदम भारतीय बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करने और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की स्वीकृति दी है। यह निर्णय सरकारी परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी घटाने और वित्तीय क्षेत्र में निजी पूंजी को आकर्षित करने के प्रयासों को गति देगा।
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आईडीबीआई बैंक का रणनीतिक पुनर्गठन

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को जानकारी दी कि आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन को मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) द्वारा स्वीकृति मिलने से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि सरकार ने बैंक को वित्तीय संकट से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अब प्रस्तावित पुनर्गठन के जरिए इसकी वृद्धि के अगले चरण को आगे बढ़ा रही है। सीतारमण ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत के सुधारों की यात्रा में आज एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है।


मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आईडीबीआई बैंक के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है। वित्त मंत्री ने बताया कि इस कदम से भारत की बैंकिंग प्रणाली को मजबूती मिलेगी और बैंकिंग सेवाएं वैश्विक मानकों के अनुरूप होंगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और सुधारों के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सीतारमण ने कहा कि रणनीतिक पुनर्गठन ऐसे वित्तीय क्षेत्र के निर्माण का हिस्सा है, जो भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हो, ग्राहकों को सशक्त बनाए, उद्यमियों को सहयोग दे और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में योगदान करे।


इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को 52,878 करोड़ रुपये में बेचने की स्वीकृति दी। यह एयर इंडिया की बिक्री के बाद देश का सबसे बड़ा रणनीतिक विनिवेश है। इससे सरकारी नियंत्रण वाले बैंकों के निजीकरण के एक नए दौर की शुरुआत होने की संभावना है।


इससे सरकारी परिसंपत्तियों में सरकार की हिस्सेदारी घटाने और वित्तीय क्षेत्र में निजी पूंजी को आकर्षित करने के प्रयासों को गति मिलेगी। पुनर्गठित इकाई में केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की संयुक्त हिस्सेदारी 34 प्रतिशत रहेगी। सरकार और एलआईसी की कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी की प्रस्तावित बिक्री से बैंक का नियंत्रण फेयरफैक्स के पास चला जाएगा।


हालांकि, यह सौदा आवश्यक नियामकीय मंजूरियों पर निर्भर करेगा।