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आरबीआई की MPC बैठक: ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी पर नजर

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक होगी, जिसमें ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी पर चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि हो सकती है, जिसका असर होम लोन और कार लोन की EMI पर पड़ेगा। महंगाई के बढ़ते आंकड़े और वैश्विक आर्थिक स्थिति के कारण यह बैठक महत्वपूर्ण बन गई है। जानें इस बैठक से क्या उम्मीदें हैं और आपके लोन पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है।
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आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक


भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 5 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है, जो 7 अक्टूबर तक चलेगी। इस बैठक से पहले अर्थशास्त्रियों और वित्तीय संस्थानों की निगाहें आरबीआई के संभावित निर्णय पर टिकी हुई हैं। बैंक ऑफ अमेरिका, SBI रिसर्च और नोमूरा का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बार रेपो रेट में वृद्धि कर सकता है।


ब्याज दरों में संभावित बदलाव

पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला दिसंबर से शुरू होगा, लेकिन अब अक्टूबर में ही इसकी शुरुआत होने की संभावना जताई जा रही है। यदि आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो इसका सीधा प्रभाव होम लोन, कार लोन और अन्य कर्जों की ब्याज दरों पर पड़ेगा, जिससे कई कर्जदारों की EMI में वृद्धि हो सकती है।


25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना

बैंक ऑफ अमेरिका के अनुसार, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों, खाद्य महंगाई और व्यापक महंगाई के दबाव को देखते हुए अक्टूबर की MPC बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी संभव है। BofA का मानना है कि लगभग दो वर्षों की मौद्रिक नरमी के बाद, आरबीआई अब नीतिगत समर्थन को वापस लेने की दिशा में कदम उठा सकता है।


SBI रिसर्च की रिपोर्ट

SBI रिसर्च ने भी अपनी रिपोर्ट में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना व्यक्त की है। रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती महंगाई, वैश्विक परिस्थितियों और लिक्विडिटी की स्थिति से ब्याज दरों में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। SBI रिसर्च ने भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के जोखिम को भी महत्वपूर्ण कारक बताया है।


महंगाई की चिंता

महंगाई के आंकड़े आरबीआई के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में CPI महंगाई 4.82 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी। इसके अलावा, मजबूत अल नीनो और अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश की आशंका रबी फसलों के उत्पादन के लिए जोखिम बढ़ा सकती है, जिसका प्रभाव खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है।


EMI में संभावित वृद्धि

यदि आरबीआई रेपो रेट में वृद्धि करता है, तो बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए कर्ज की लागत बढ़ सकती है। इसका प्रभाव विशेष रूप से उन ग्राहकों पर पड़ेगा जिनके लोन की ब्याज दरें रेपो रेट से जुड़ी हैं। होम लोन और कार लोन की ब्याज दर बढ़ने पर EMI में वृद्धि हो सकती है या लोन की अवधि बढ़ सकती है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव बैंक की ब्याज दर, लोन की राशि, बकाया अवधि और ग्राहक की ब्याज दर व्यवस्था पर निर्भर करेगा।


आरबीआई की MPC बैठक के बाद 7 अक्टूबर को केंद्रीय बैंक के निर्णय से स्पष्ट होगा कि रेपो रेट में वास्तव में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।