आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25% की वृद्धि की, महंगाई पर ध्यान केंद्रित
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति का निर्णय
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार को अपनी तीन दिवसीय बैठक के बाद महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (0.25%) की वृद्धि की है। अब रेपो दर 5.50% हो गई है। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में वृद्धि की है। इस निर्णय का सीधा प्रभाव आम जनता पर पड़ेगा, जिससे होम लोन, कार लोन और व्यक्तिगत लोन की EMI महंगी होने की संभावना है। 5 से 7 अक्टूबर तक चली MPC की बैठक में सर्वसम्मति से दरें बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही RBI ने अपनी नीति का रुख बदलकर "कैलिब्रेटेड टाइटनिंग" (सोच-समझकर सख्ती) कर दिया है, जिसका अर्थ है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है।
महंगाई के बढ़ते दबाव
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह निर्णय महंगाई के बदलते हालात को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा, "महंगाई और उसके हालात अब उतने सामान्य नहीं हैं जितने पिछले साल थे।" अगले तीन तिमाहियों में हेडलाइन CPI महंगाई औसतन 5.8% रहने की उम्मीद है, जबकि पूरे वित्तीय वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 4.4% है।
रेपो रेट में वृद्धि के कारण
आरबीआई का यह निर्णय वैश्विक खाद्य और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि, वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक वित्तीय हालात के सख्त होने के बीच आया है। मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक वृद्धि मजबूत बनी हुई है, लेकिन इस वर्ष इसके धीमे होने की संभावना है। इसके अलावा, खाद्य और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें वैश्विक महंगाई को बढ़ा रही हैं और प्रमुख केंद्रीय बैंकों को मौद्रिक नीति को सख्त करने के लिए मजबूर कर रही हैं।
महंगाई पर ध्यान केंद्रित करना
MPC का निर्णय मुख्य रूप से महंगाई के बदलते हालात पर केंद्रित था। मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई की उम्मीदें बढ़ने और कीमतों पर दबाव बढ़ने के कुछ संकेत मिले हैं, हालांकि सप्लाई-साइड दबाव के सीमित संकेत हैं। RBI ने यह भी कहा कि सप्लाई शॉक के 'सेकंड-राउंड' असर को काबू करने में मौद्रिक नीति को समय लग सकता है।
रेट में कटौती की संभावना
पॉलिसी के रुख को 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' में बदलना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे निकट भविष्य में रेट में कटौती की संभावना समाप्त हो जाती है। मल्होत्रा ने कहा कि RBI के अगले कदम महंगाई और वृद्धि की दिशा पर निर्भर करेंगे। उन्होंने कहा, "मौजूदा हालात को देखते हुए, निकट भविष्य में रेट में कटौती की कोई संभावना नहीं है।"
