इंडिगो के एमडी ने विमानन क्षेत्र में करों में कटौती की मांग की
विमानन क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता
इंडिगो एयरलाइन के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने सरकार से विमानन उद्योग में करों में कमी और हवाई अड्डा शुल्कों को तर्कसंगत बनाने की अपील की है। उनका मानना है कि यदि हवाई किराए में कमी आती है, तो देश में यात्रा की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। भाटिया ने कहा कि हवाई यात्रा को एक सार्वजनिक सेवा माना जाता है, लेकिन इस पर कर इस तरह लगाए जाते हैं जैसे यह केवल उच्च वर्ग के लिए हो। उन्होंने बताया कि भारतीय एयरलाइंस विभिन्न करों और शुल्कों के कारण बढ़ती लागत का बोझ खुद उठाती हैं, जिसका अंततः असर यात्रियों पर पड़ता है।
महंगाई और किराए का असंतुलन
भाटिया ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में महंगाई दर 12 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि एयरलाइंस के मूल किराए में केवल 1 से 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके विपरीत, हवाई अड्डा उपयोगकर्ता विकास शुल्क (यूडीएफ) में 95 प्रतिशत और लैंडिंग एवं पार्किंग शुल्क में 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि विमानन ईंधन एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत है, और हाल के समय में तेल की कीमतों में वृद्धि और पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण उड़ान की लागत में इजाफा हुआ है।
यात्रा की मांग में संभावित वृद्धि
भाटिया ने भारतीय उपभोक्ताओं की संवेदनशीलता को देखते हुए कहा कि यदि किराए में कमी आती है, तो यात्रा की मांग में बड़ा उछाल आ सकता है। इसके साथ ही, उन्होंने उड़ान ड्यूटी समयसीमा (एफडीटीएल) नियमों की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया, यह कहते हुए कि मौजूदा नियम कॉकपिट की उत्पादकता को कम करते हैं और लागत बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि एयरलाइंस सुरक्षा मानकों में कोई समझौता नहीं करना चाहती, लेकिन पायलट के उड़ान ड्यूटी नियम वैश्विक मानकों के अनुरूप होने चाहिए।
इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी
इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी को लेकर उठ रही चिंताओं पर भाटिया ने कहा कि यह धारणा गलत है कि एयरलाइन बहुत बड़ी हो गई है। उन्होंने बताया कि एयरलाइन की लगभग 34 प्रतिशत क्षमता 250 नए शहरों में लगाई गई है, जहां नए बाजार विकसित किए गए हैं। प्रतिस्पर्धी बाजारों में इसकी हिस्सेदारी लगभग 40-44 प्रतिशत है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह करीब 20 प्रतिशत है।
विमानन उद्योग की संभावनाएं
इंडिगो प्रतिदिन 2,100 से अधिक उड़ानें संचालित करती है और इसके बेड़े में 400 से अधिक विमान हैं। भाटिया ने कहा कि विमानन उद्योग एक कम मार्जिन वाला व्यवसाय है, जहां लागत में मामूली बदलाव भी बड़ा प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के तेजी से बढ़ते विमानन बाजार की संभावनाओं को साकार करने के लिए सरकार, एयरलाइंस और हवाई अड्डा संचालकों के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है।
