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इन्फोसिस पर अमेरिकी श्रम प्रमाणन रोक का सीमित प्रभाव

इन्फोसिस ने अमेरिकी प्रशासन द्वारा स्थायी श्रम प्रमाणन (पीईआरएम) कार्यक्रम पर रोक के निर्णय का गंभीर प्रभाव न पड़ने की बात कही है। कंपनी ने स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती और प्रौद्योगिकी केंद्रों के विकास में निवेश की पुष्टि की है। इसके अलावा, उसने सभी लागू कानूनों का पालन करने का आश्वासन दिया है। जानें इस फैसले का भारतीय आईटी कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा और इन्फोसिस की भविष्य की योजनाएँ क्या हैं।
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इन्फोसिस की प्रतिक्रिया

अमेरिकी प्रशासन द्वारा स्थायी श्रम प्रमाणन (पीईआरएम) कार्यक्रम के तहत नए और लंबित आवेदनों पर रोक लगाने के निर्णय का भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी इन्फोसिस के संचालन पर कोई गंभीर प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। कंपनी ने शेयर बाजारों को भेजी गई सूचना में यह जानकारी दी है। बेंगलुरु स्थित इन्फोसिस ने कहा कि वह अमेरिकी श्रम विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर उनके प्रश्नों और चिंताओं का समाधान करने के लिए तत्पर है।


कंपनी की प्रतिबद्धता

कंपनी ने अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती और प्रौद्योगिकी तथा नवोन्मेषण केंद्रों के विकास में निवेश करने की बात कही है। उसने अपने कर्मचारियों, ग्राहकों और अमेरिकी समुदायों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन करने का आश्वासन दिया। यह बयान उस समय आया जब अमेरिकी प्रशासन ने आठ प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों को पीईआरएम कार्यक्रम से निलंबित किया।


प्रमुख कंपनियों की सूची

इसमें भारत की प्रमुख आईटी कंपनियां जैसे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। इसके अलावा, कैपजेमिनी, कॉग्निजेंट, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब भी इस निर्देश में शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास की प्रक्रिया घरेलू श्रमिकों के अवसरों को प्रभावित कर सकती है।


पीईआरएम प्रक्रिया का महत्व

पीईआरएम अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा जारी किया जाता है और यह विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार-आधारित ‘ग्रीन कार्ड’ प्राप्त करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण है। हालांकि, उद्योग के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय आईटी कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में पीईआरएम आवेदनों की संख्या में उल्लेखनीय कमी की है, जिससे अमेरिकी फैसले का संभावित परिचालन प्रभाव सीमित रहने की संभावना है।


आवेदनों की संख्या में कमी

आंकड़ों के अनुसार, टीसीएस ने अमेरिकी वित्त वर्ष 2026 में केवल दो पीईआरएम आवेदन प्रस्तुत किए, जबकि 2025 में यह संख्या 513 और 2024 में 1,804 थी। एचसीएल ने 2026 में 59 आवेदन किए, जबकि 2025 में यह संख्या 323 थी। इन्फोसिस ने 2024 में 87 पीईआरएम आवेदन किए थे।


विप्रो और एचसीएल का प्रदर्शन

विप्रो ने 2024 में 257 और 2025 में 523 आवेदन प्रस्तुत किए। वर्ष 2024 में दाखिल 257 आवेदनों में से 169 अस्वीकार कर दिए गए, जबकि कंपनी ने 88 आवेदन वापस ले लिए। एचसीएल टेक्नोलॉजीज के पूर्व सीईओ विनीत नायर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि पिछले वर्ष कुल 1,17,849 पीईआरएम में भारतीय आईटी कंपनियों की हिस्सेदारी 1,400 से कम थी, जो दो प्रतिशत से भी कम है।


टीसीएस की स्थिति

टीसीएस ने भी इस फैसले के प्रभाव को सीमित बताते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में उसके पीईआरएम आवेदन एकल अंक में रह गए हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि अमेरिका में उसकी कार्यबल रणनीति स्थानीय प्रतिभाओं की भर्ती पर आधारित है, जिसे मजबूत ‘कैंपस’ भर्ती व्यवस्था का समर्थन प्राप्त है।


भविष्य की योजनाएँ

कंपनी ने अमेरिका में अपने 31 कार्यालयों और डिलिवरी केंद्रों के माध्यम से स्थानीय कार्यबल तैयार किया है। इसके अलावा, उसने अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15,000 अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती करने की योजना पर कायम रहने की बात कही है।