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उच्चतम न्यायालय ने NSE के को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों का निपटान किया

उच्चतम न्यायालय ने NSE के को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों का निपटान किया है, जिसमें सेबी के साथ 1,500 करोड़ रुपये के समझौते को मंजूरी दी गई। यह निर्णय उस समय आया है जब NSE अपने आईपीओ की तैयारी कर रहा है। जानें इस महत्वपूर्ण मामले के बारे में और क्या है इसके पीछे की कहानी।
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उच्चतम न्यायालय का निर्णय

नई दिल्ली, तीन सितंबर: उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के खिलाफ दायर याचिकाओं का निपटान कर दिया। यह निर्णय तब लिया गया जब सेबी ने एनएसई के साथ 1,500 करोड़ रुपये के समझौते को मंजूरी दी। ‘को-लोकेशन’ और ‘डार्क फाइबर’ मामलों में कुछ शेयर ब्रोकरों पर आरोप है कि उन्होंने बाजार के आंकड़े अन्य निवेशकों से पहले और अनुचित तरीके से प्राप्त किए।


न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस प्रस्तावित समझौते का संज्ञान लेते हुए सेबी की याचिकाओं का निपटान किया। एनएसई ने जुलाई में नियामक से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद लंबित ‘को-लोकेशन’ और ‘डार्क फाइबर’ मामलों के निपटान के लिए 714.74 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। इन मामलों में कुल 1,491.21 करोड़ रुपये के समझौते पर सहमति बनी थी।


एनएसई ने पहले 776.47 करोड़ रुपये जमा किए थे। हालिया भुगतान के साथ, संशोधित शर्तों के तहत निर्धारित 1,491.21 करोड़ रुपये की पूरी समझौता राशि का भुगतान किया गया है। एनएसई ने 20 जून, 2025 को सेबी के समक्ष दो अलग-अलग समझौता आवेदन प्रस्तुत किए थे।


इन आवेदन में ‘को-लोकेशन’ और ‘डार्क फाइबर’ मामलों के लिए कुल 1,387.39 करोड़ रुपये के समझौते का प्रस्ताव रखा गया था। इसके बाद, 13 मार्च, 2026 को एनएसई ने समझौते की शर्तों को संशोधित करते हुए कुल राशि को 1,491.21 करोड़ रुपये कर दिया। यह समझौता उस समय हुआ है जब देश का सबसे बड़ा शेयर बाजार अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की तैयारी कर रहा है।


एनएसई ने जून में आईपीओ के लिए सेबी के पास मसौदा दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। प्रस्तावित आईपीओ में मौजूदा शेयरधारकों द्वारा 14.89 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री पेशकश शामिल है, जो शेयर बाजार की कुल इक्विटी पूंजी का लगभग छह प्रतिशत है।


सूत्रों के अनुसार, चूंकि आईपीओ में नए शेयर जारी करने का कोई हिस्सा नहीं है, इसलिए प्रस्तावित निर्गम का आकार लगभग 30,000 करोड़ रुपये रहने की संभावना है। यह भारतीय पूंजी बाजार में सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में से एक होगा।