उच्चतम न्यायालय ने डिजिटल अरेस्ट पर चिंता जताई, ठगी के मामलों में बढ़ोतरी
डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर न्यायालय की चिंता
उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की है। न्यायालय ने यह सवाल उठाया कि जन जागरूकता अभियानों, समाचारों और अदालतों के आदेशों के बावजूद, शिक्षित लोग मोबाइल फोन पर गिरफ्तारी के नाम पर ठगी का शिकार कैसे हो रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, "इन पीड़ितों को क्या हो गया है? वे इस तरह जाल में कैसे फंस रहे हैं?"
उन्होंने आगे कहा, "क्या वे इतनी बुनियादी बात भी नहीं समझ सकते? मोबाइल फोन पर गिरफ्तारी का डर कैसा है? अगर आप मोबाइल को दीवार पर मार देंगे, तो गिरफ्तारी खत्म हो जाएगी।"
न्याय मित्र एन एस नप्पिनई ने अदालत को बताया कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों को रोकने के लिए कई प्रयास किए गए हैं, फिर भी ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं। उन्होंने एक हालिया मामले का जिक्र किया, जिसमें एक महिला को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.5 करोड़ रुपये की ठगी का सामना करना पड़ा।
मुख्य न्यायाधीश ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा, "हमें यह देखकर दुख होता है कि पढ़े-लिखे लोग भी ठगी का शिकार हो रहे हैं। अगर इस उम्र में आप डिजिटल अरेस्ट के शिकार हो रहे हैं, तो अगली पीढ़ी को क्या सिखाएंगे?"
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने जाली दस्तावेजों से जुड़े डिजिटल अरेस्ट के मामलों में स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की। यह मामला डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित है।
शीर्ष अदालत ने बैंकों को निर्देश दिया कि वे डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी के प्रति संवेदनशील ग्राहकों के लिए सुरक्षा कवच का काम करें। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने बताया कि न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद डिजिटल अरेस्ट के मामलों में 50 प्रतिशत की कमी आई है।
बैंक अब संदिग्ध लेनदेन की पहचान कर रहे हैं और भारतीय रिजर्व बैंक के साथ नियम बनाने के संबंध में बैठकें कर रहे हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि वह ऐसे निर्देश देने पर विचार कर रही है, जिनके तहत डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी धोखाधड़ी में बैंक की विफलता पर पीड़ित को मुआवजा दिया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "जहां भी ऐसी धोखाधड़ी होती है, बैंक पीड़ित को मुआवजा देगा और अभियोजन का सामना करेगा।" पीठ ने यह भी कहा कि वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों के नुकसान की भरपाई के लिए बैंकों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
