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उत्तराखंड की प्रीमियम लीची का यूरोपीय बाजार में प्रवेश

उत्तराखंड की प्रीमियम लीची ने यूरोपीय बाजार में अपनी पहली खेप भेजी है, जो भारतीय फलों की गुणवत्ता को दर्शाता है। इस पहल से किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है, जिससे उनकी आय में सुधार हो रहा है। जानें इस निर्यात के पीछे की कहानी और इसके लाभ।
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उत्तराखंड की प्रीमियम लीची का यूरोपीय बाजार में प्रवेश

उत्तराखंड की लीची का अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम

उत्तराखंड की विशेष लीची अब यूरोपीय बाजार में अपनी पहचान बना रही है। देहरादून से इटली के लिए ताजे फलों का पहला निर्यात बृहस्पतिवार को शुरू किया गया।


शुक्रवार को अधिकारियों ने जानकारी दी कि केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से एक टन लीची की पहली खेप भेजी गई। इस पहल में उत्तराखंड सरकार, निर्यातक, किसान उत्पादक संगठन, लॉजिस्टिक भागीदार और अन्य संबंधित पक्षों का समन्वित प्रयास शामिल रहा।


अधिकारियों के अनुसार, यह कदम उत्तराखंड की प्रीमियम लीची के यूरोपीय बाजार में प्रवेश का प्रतीक है और यह भारत के उच्च गुणवत्ता वाले ताजे फलों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता को दर्शाता है। देहरादून की लीची अपनी मिठास, आकर्षक लाल रंग, सुगंध और बेहतरीन गूदे के लिए प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र रोज़ सेंटेड, कलकत्तिया और बेदाना जैसी लोकप्रिय किस्मों के लिए जाना जाता है।


उत्तराखंड की अनुकूल कृषि जलवायु, विशेषकर देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और उधम सिंह नगर जिलों में, इस फल की गुणवत्ता और बाजार में आकर्षण को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस निर्यात पहल से किसानों की आय में सुधार हुआ है, जिससे उन्हें घरेलू बाजार की दरों की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हुआ है।