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एन चंद्रशेखरन को टाटा संस का चेयरमैन फिर से नियुक्त किया गया

टाटा समूह की प्रमुख कंपनी टाटा संस ने एन चंद्रशेखरन को तीसरे कार्यकाल के लिए चेयरमैन नियुक्त किया है, जबकि उन्होंने पहले ही अपने पद पर बने रहने की इच्छा नहीं जताई थी। यह निर्णय आरबीआई द्वारा टाटा संस के एनबीएफसी पंजीकरण को खारिज करने के बाद आया है। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और कंपनी की संभावित बाजार सूचीबद्धता के बारे में।
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चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति

टाटा समूह की प्रमुख कंपनी टाटा संस के निदेशक मंडल ने एन चंद्रशेखरन को पांच साल के लिए तीसरे कार्यकाल के लिए चेयरमैन नियुक्त करने का निर्णय लिया है। यह जानकारी उन स्रोतों से मिली है जो इस मामले से अवगत हैं। हालांकि, चंद्रशेखरन ने कुछ सप्ताह पहले ही निदेशक मंडल को बताया था कि वह अपने दूसरे कार्यकाल के बाद चेयरमैन पद पर बने रहने की इच्छा नहीं रखते।


आरबीआई का निर्णय और बाजार में संभावनाएं

चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा टाटा संस के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) पंजीकरण को समाप्त करने के आवेदन को खारिज करने के बाद लिया गया है। इस निर्णय से कंपनी के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की संभावनाएं फिर से बढ़ गई हैं। टाटा संस पिछले एक वर्ष से अधिक समय से बाजार में सूचीबद्धता से बचने का प्रयास कर रही थी।


कर्ज चुकाने की प्रक्रिया

कंपनी ने इस दौरान 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया है। निदेशक मंडल के सदस्यों का मानना है कि नेतृत्व में निरंतरता से संभावित निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, खासकर जब कंपनी अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की दिशा में बढ़ेगी।


नोएल टाटा का मत

सूत्रों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया, लेकिन यह प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया। नोएल टाटा की अगुवाई वाले टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।


नियामकीय चुनौतियाँ

आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को ‘अपर लेयर’ एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया था, जिसके तहत इन कंपनियों को तीन साल के भीतर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना अनिवार्य है। यह समयसीमा सितंबर 2025 में समाप्त हो रही है।


चंद्रशेखरन का नेतृत्व

चंद्रशेखरन 2017 से टाटा संस का नेतृत्व कर रहे हैं और उन्होंने साइरस मिस्त्री को पद से हटाए जाने के बाद रतन टाटा का स्थान लिया था। उन्हें 2022 में दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त किया गया था।


भविष्य की संभावनाएं

टाटा संस की संभावित बाजार सूचीबद्धता भारत के बड़े सार्वजनिक निर्गमों में से एक हो सकती है। कंपनी में केवल एक प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री से भी 15,000-20,000 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं, जिससे टाटा संस का कुल मूल्यांकन लगभग 20 लाख करोड़ रुपये हो सकता है।