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एनएमडीसी का खनन कारोबार में विविधता लाने का प्रयास

एनएमडीसी, भारत की प्रमुख लौह अयस्क खनन कंपनी, अब अपने कारोबार में विविधता लाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। कंपनी चार महाद्वीपों में लिथियम, तांबा, कोबाल्ट और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की खोज कर रही है। इसका उद्देश्य भविष्य में तेजी से विकसित हो रहे उद्योगों की कच्चे माल की आवश्यकताओं को पूरा करना है। एनएमडीसी ने अपने कुल राजस्व का 20 प्रतिशत अन्य खनिजों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। जानें इस रणनीति के पीछे की सोच और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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एनएमडीसी की नई रणनीति

(अभिषेक सोनकर) नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर - भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की लौह अयस्क खनन कंपनी एनएमडीसी अब अपने व्यवसाय में विविधता लाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। यह कंपनी चार महाद्वीपों में खनन संपत्तियों की खोज कर रही है, जिसमें दक्षिण अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक शामिल हैं। इसमें लिथियम, तांबा, कोबाल्ट और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के भंडार की तलाश की जा रही है।


भविष्य की जरूरतों को पूरा करना

कंपनी का लक्ष्य भविष्य में तेजी से विकसित हो रहे उद्योगों जैसे वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और इस्पात की कच्चे माल की आवश्यकताओं को पूरा करना है। उद्योग के सूत्रों के अनुसार, एनएमडीसी चिली, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, ब्राजील और एशिया के कुछ क्षेत्रों में लिथियम, तांबा, कोबाल्ट और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के खनन की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है। इसके अलावा, कंपनी यूएई, ओमान, भूटान और ऑस्ट्रेलिया में चूना पत्थर, डोलोमाइट, कोकिंग कोयला और टंगस्टन के खनन ब्लॉकों की खोज भी कर रही है।


लौह अयस्क पर निर्भरता कम करना

वर्तमान में, एनएमडीसी भारत की लौह अयस्क की मांग का लगभग एक-चौथाई हिस्सा पूरा करती है। हालांकि, कंपनी अब लौह अयस्क पर अपनी निर्भरता को कम करते हुए अन्य खनिजों के क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति को मजबूत करना चाहती है। कंपनी ने भविष्य में अपने कुल राजस्व का कम से कम 20 प्रतिशत अन्य खनिजों की बिक्री से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।


सरकार की पहल के अनुरूप

एनएमडीसी ने इस संबंध में कहा, "वर्तमान में हमारा कारोबार 99.9 प्रतिशत लौह अयस्क पर आधारित है। हमारा उद्देश्य देश के तेजी से बढ़ते उद्योगों की खनिज आवश्यकताओं को पूरा करना है।" इससे पहले, एनएमडीसी के चेयरमैन अमिताव मुखर्जी ने कंपनी के विविधीकरण की रणनीति की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा कि एनएमडीसी केवल लौह अयस्क से ही नहीं, बल्कि अन्य खनिजों से भी महत्वपूर्ण राजस्व अर्जित करना चाहती है।


महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता

कंपनी की यह रणनीति केंद्र सरकार की उन पहलों के अनुरूप है, जिनका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करना और विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता को कम करना है। लिथियम, कोबाल्ट और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों के उत्पादन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


इस्पात क्षेत्र की चुनौतियाँ

इस्पात मंत्रालय के दृष्टिकोण के अनुसार, इस्पात उत्पादन की कुल लागत में कच्चे माल की हिस्सेदारी लगभग 65 से 70 प्रतिशत होती है। नीति में घरेलू खनन को बढ़ावा देने, कोल वॉशरी के विस्तार, खनन संपत्तियों के अधिग्रहण, दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों और कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित कोयला मिश्रण अनुकूलन के माध्यम से आयात निर्भरता को कम करने पर जोर दिया गया है। सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं से देश में विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार की उम्मीद है।


विनिर्माण गतिविधियों का विस्तार

इससे वाहन उद्योग, इंजीनियरिंग उत्पादों, मशीनरी, जहाज निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों और रक्षा उत्पादन में इस्पात की मांग बढ़ने की संभावना है।