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एनएसई का आईपीओ: 30,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को 30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए सेबी से मंजूरी मिल गई है, जो इसे भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बना सकता है। मौजूदा शेयरधारक 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे, और यह निर्गम 15 सितंबर को खुलने की संभावना है। एनएसई का बाजार पूंजीकरण इस आईपीओ के बाद पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। जानें इस आईपीओ की यात्रा और इसके महत्व के बारे में।
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एनएसई को मिला आईपीओ के लिए सेबी का हरी झंडी

नई दिल्ली, चार सितंबर: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को लगभग 30,000 करोड़ रुपये के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए बाजार नियामक सेबी से मंजूरी प्राप्त हुई है। यह भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बनने की संभावना रखता है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नियामक ने एनएसई को आईपीओ प्रस्ताव पर आगे बढ़ने की अनुमति दी है।


आईपीओ की संरचना और हिस्सेदारी

एनएसई का आईपीओ पूरी तरह से बिक्री पेशकश (ओएफएस) पर आधारित होगा, जिसमें मौजूदा शेयरधारक लगभग छह प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर 14.89 करोड़ शेयर बेचेंगे। चूंकि यह ओएफएस है, इसलिए जुटाई गई राशि एनएसई को नहीं, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को प्राप्त होगी।


आईपीओ की संभावित तिथियाँ

सूत्रों के अनुसार, एनएसई अगले सप्ताह आईपीओ के लिए मूल्य दायरा और अन्य महत्वपूर्ण विवरणों की घोषणा कर सकता है। इस निर्गम के 15 सितंबर को खुलने और 24-25 सितंबर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की संभावना है। यदि एनएसई 30,000 करोड़ रुपये जुटाने में सफल होता है, तो यह अक्टूबर 2024 में आए हुंदै मोटर इंडिया के 27,858.75 करोड़ रुपये के आईपीओ का रिकॉर्ड तोड़ देगा।


प्रतिस्पर्धा और रिकॉर्ड

हालांकि, सबसे बड़े आईपीओ का खिताब पाने के लिए एनएसई को रिलायंस की डिजिटल सेवा इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के प्रस्तावित निर्गम से प्रतिस्पर्धा करनी होगी, जिसका आकार लगभग 37,700 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। एनएसई का आईपीओ 2022 में आए एलआईसी के 20,557.23 करोड़ रुपये के निर्गम के अलावा 2021 में आए पेटीएम के 18,300 करोड़ रुपये, 2025 में आए टाटा कैपिटल के 15,511.87 करोड़ रुपये और 2010 में आए कोल इंडिया के 15,200 करोड़ रुपये के आईपीओ से भी बड़ा होगा।


एनएसई का बाजार पूंजीकरण

लगभग एक दशक की नियामकीय बाधाओं के बाद आने वाला यह आईपीओ एनएसई को बाजार पूंजीकरण के मामले में भारत की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल कर सकता है। सूत्रों के अनुसार, 30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ से एनएसई का बाजार पूंजीकरण पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। एनएसई ने इस साल 17 जून को सेबी के पास मसौदा दस्तावेज प्रस्तुत किए थे।


शेयरधारकों की हिस्सेदारी

मसौदा दस्तावेज के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) आईपीओ में 2.48 करोड़ तक शेयर बेचेगा, जबकि एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगी। एसबीआई की एनएसई में 3.23 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि उसकी अनुषंगी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की एक्सचेंज में 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है।


एलआईसी की हिस्सेदारी

हालांकि, एनएसई की सबसे बड़ी शेयरधारक कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपनी 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी में से कोई भी शेयर नहीं बेचेगी। एनएसई के निदेशक मंडल ने इस साल छह फरवरी को आईपीओ लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे पहले एक्सचेंज को सेबी से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिल गया था।


आईपीओ की यात्रा

एनएसई के आईपीओ तक पहुंचने का सफर लंबा रहा है। इसने 2016 में पहली बार ओएफएस के माध्यम से लगभग 10,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए मसौदा दस्तावेज दाखिल किए थे। लेकिन नियामकीय खामियों और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के कारण सेबी ने इसकी मंजूरी में देरी की थी।