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एनएसई का आईपीओ: खुदरा निवेशकों के लिए मूल्य दायरा तय

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) ने अपने आईपीओ के लिए मूल्य दायरा निर्धारित किया है, जो खुदरा निवेशकों को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है। इस आईपीओ में एंकर बुक में प्रमुख निवेश कंपनियों की रुचि देखने को मिली है। आईपीओ 17 से 21 सितंबर तक खुला रहेगा, जिसमें प्रति शेयर 1,700 से 1,785 रुपये का मूल्य होगा। एनएसई के निवेशक 30 जून, 2026 तक देश के 99 प्रतिशत पिन कोड क्षेत्रों में मौजूद हैं, जिससे वित्तीय अवसरों तक पहुंच आसान हो गई है। जानें इस आईपीओ के बारे में और अधिक जानकारी।
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एनएसई के आईपीओ का मूल्य दायरा

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनएसई) के प्रबंध निदेशक और सीईओ आशीष कुमार चौहान ने मंगलवार को बताया कि खुदरा निवेशकों को ध्यान में रखते हुए एनएसई के आईपीओ के लिए मूल्य दायरा निर्धारित किया गया है। देश के सबसे बड़े शेयर बाजार के आईपीओ का मूल्य दायरा अपेक्षा से कम रहने की चर्चा के बीच चौहान ने यह जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि 22,569 करोड़ रुपये के इस आईपीओ में एंकर बुक में बड़े निवेशकों की भागीदारी काफी अधिक है, जो हमारी उम्मीदों से कहीं ज्यादा है।


संस्थागत निवेशकों की रुचि

इससे यह स्पष्ट होता है कि इस बड़े निर्गम में संस्थागत निवेशकों की मजबूत रुचि है। सूत्रों के अनुसार, गोल्डमैन सैक्स एसेट मैनेजमेंट, फ्रैंकलिन टेम्पलटन और फिडेलिटी इंटरनेशनल जैसी प्रमुख निवेश कंपनियों ने एंकर बुक में रुचि दिखाई है। इसके अलावा, नॉर्वे बैंक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और जीआईसी भी एंकर बुक में बोली लगाने की संभावना रखते हैं।


आईपीओ की समयसीमा और मूल्य

एनएसई का आईपीओ आम निवेशकों के लिए 17 सितंबर से 21 सितंबर तक खुला रहेगा। कंपनी ने प्रति शेयर 1,700 से 1,785 रुपये का मूल्य दायरा निर्धारित किया है, जिससे उच्च मूल्य सीमा पर 22,569 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। एंकर निवेशक 16 सितंबर को शेयरों के लिए बोली लगा सकेंगे। निवेशक न्यूनतम आठ शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं और इसके बाद आठ-आठ शेयरों के गुणक में आवेदन कर सकते हैं।


खुदरा निवेशकों के लिए आकर्षण

चौहान ने कहा कि मर्चेंट बैंकरों ने खुदरा निवेशकों को ध्यान में रखते हुए यह मूल्य तय किया है, जिससे उम्मीद है कि वे इसमें निवेश के लिए आकर्षित होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि एनएसई के निवेशक 30 जून, 2026 तक देश के 99 प्रतिशत से अधिक पिन कोड क्षेत्रों में मौजूद हैं, जिससे वित्तीय अवसरों तक पहुंच आसान हुई है।


पंजीकृत निवेशकों की संख्या में वृद्धि

कंपनी के विशिष्ट पंजीकृत निवेशकों की संख्या में सालाना आधार पर 26.23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह संख्या 31 मार्च, 2020 को 3.08 करोड़ थी, जो 30 जून, 2026 तक बढ़कर 13.23 करोड़ हो जाएगी। इस आईपीओ में मौजूदा शेयरधारक 12,64,36,650 शेयरों की बिक्री पेशकश करने जा रहे हैं।


बिक्री करने वाले शेयरधारक

बिक्री करने वाले शेयरधारकों में भारतीय स्टेट बैंक, कनाडा पेंशन योजना निवेश बोर्ड, अरंडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) पीटीई लिमिटेड, एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड शामिल हैं।


नियामक नियम और बाजार हिस्सेदारी

बाजार नियामक सेबी के नियमों के अनुसार, इसमें अधिकतम 50 प्रतिशत हिस्सा पात्र संस्थागत खरीदारों के लिए, कम-से-कम 15 प्रतिशत गैर-संस्थागत निवेशकों के लिए और कम-से-कम 35 प्रतिशत खुदरा व्यक्तिगत निवेशकों के लिए आरक्षित होगा। एनएसई ने 1994 में कामकाज शुरू किया था और यह भारत में इलेक्ट्रॉनिक या स्क्रीन आधारित कारोबार शुरू करने वाला पहला शेयर बाजार था।


एनएसई की सेवाएं

यह शेयरों की सूचीबद्धता, कारोबार, समाशोधन एवं निपटान, सूचकांक और बाजार आंकड़ों जैसी सेवाएं उपलब्ध कराता है। कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 और 30 जून, 2026 को समाप्त तीन महीने की अवधि में नकद बाजार में उसका कारोबार के कुल मूल्य के आधार पर बाजार हिस्सा क्रमशः 92.99 प्रतिशत और 93.05 प्रतिशत रहा। इसी तरह, शेयर वायदा में उसका बाजार हिस्सा क्रमशः 99.79 प्रतिशत और 99.72 प्रतिशत रहा।


पंजीकृत निवेशक खाते और सूचीबद्ध कंपनियां

तीस जून, 2026 तक एनएसई पर 26.136 करोड़ पंजीकृत निवेशक खाते, 1,328 कारोबारी सदस्य और 3,005 सूचीबद्ध कंपनियां थीं। सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 474.08 लाख करोड़ रुपये था। बाजार नियामक सेबी द्वारा पिछले सप्ताह निर्गम आगे बढ़ाने की मंजूरी दिए जाने के बाद एनएसई का यह आईपीओ आया है।


लंबित सूचीबद्धता योजना

‘को-लोकेशन’ यानी कुछ कारोबारियों को तेजी से सूचना मिलने से जुड़े विवाद समेत विभिन्न नियामकीय अड़चनों के कारण इसकी सूचीबद्धता योजना करीब एक दशक से अटकी हुई थी।