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एनसीएलएटी ने शुभकामना बिल्डटेक के मामले में सुरक्षित कर्जदाता का दर्जा देने से किया इनकार

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने शुभकामना बिल्डटेक की दिवाला प्रक्रिया में सुरक्षित कर्जदाता का दर्जा देने की अपील को खारिज कर दिया है। न्यायाधिकरण ने कहा कि 2026 में किए गए संशोधन के आधार पर शुल्क को सुरक्षित हित के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती। इस निर्णय का प्रभाव घर खरीदारों पर पड़ेगा, क्योंकि इससे उन्हें अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ेगा। जानें इस मामले में और क्या हुआ।
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एनसीएलएटी का निर्णय

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने रियल एस्टेट कंपनी शुभकामना बिल्डटेक की दिवाला प्रक्रिया में सुरक्षित कर्जदाता का दर्जा देने के लिए नोएडा और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरणों द्वारा की गई अपील को खारिज कर दिया है। न्यायाधिकरण की दो सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में 2026 में किए गए संशोधन के आधार पर शुल्क को सुरक्षित हित के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही, पीठ ने पहले के निर्णय को बरकरार रखते हुए दोनों प्राधिकरणों को असुरक्षित परिचालन ऋणदाता माना।


प्राधिकरणों के दावे

नोएडा ने 99.32 करोड़ रुपये और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 60.64 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था। समाधान योजना में इन बकायों के लिए क्रमशः 25 करोड़ रुपये और 18.5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। प्राधिकरणों ने उच्चतम न्यायालय के कुछ महत्वपूर्ण मामलों का हवाला दिया।


एनसीएलएटी का स्पष्टीकरण

हालांकि, एनसीएलएटी ने कहा कि 26 मई, 2026 से लागू संशोधन के बाद केवल कानून के आधार पर बने शुल्क के माध्यम से 'सुरक्षा हित' का दावा नहीं किया जा सकता। एनसीएलएटी ने यह भी बताया कि दोनों प्राधिकरणों और कंपनी के बीच भूमि पट्टे के दस्तावेजों में सभी बकायों पर सामान्य और बिना शर्त शुल्क का प्रावधान नहीं था।


घर खरीदारों पर प्रभाव

वकील आदित्य पारोलिया ने बताया कि दोनों प्राधिकरणों के दावों और समाधान योजना में किए गए प्रावधान के बीच लगभग 116 करोड़ रुपये का अंतर था। यदि अपील मंजूर होती, तो यह राशि घर खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती थी। उन्होंने कहा कि इस निर्णय के बाद शुभकामना सिटी और शुभकामना टेकहोम्स परियोजनाओं के घर खरीदारों को समाधान योजना के तहत अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ेगा।


मतदान का परिणाम

एनसीएलएटी के निर्देश पर हुए मतदान में 95.6 प्रतिशत घर खरीदारों ने दोनों प्राधिकरणों को सुरक्षित लेनदार का दर्जा देने के खिलाफ मतदान किया। एनसीएलएटी ने अपने 43 पृष्ठ के आदेश में कहा, 'अपीलें खारिज की जाती हैं।'