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एनसीएलएटी ने सिंटेक्स इंडस्ट्रीज के शेयरधारक का 110 करोड़ रुपये का दावा खारिज किया

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने सिंटेक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड के एक शेयरधारक द्वारा किए गए 110 करोड़ रुपये के दावे को खारिज कर दिया है। इस निर्णय के पीछे 'क्लीन स्लेट' सिद्धांत का महत्व है, जो कंपनी के नए प्रबंधन को पुराने कर्जों से मुक्त करने का अवसर प्रदान करता है। जानें इस मामले में क्या हुआ और शेयरधारक टाइटस बाबू ने क्या तर्क दिए।
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एनसीएलएटी का निर्णय

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के 'क्लीन स्लेट' सिद्धांत को मान्यता देते हुए सिंटेक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड (एसआईएल) के एक शेयरधारक द्वारा किए गए लगभग 110 करोड़ रुपये के दावे को खारिज कर दिया है। एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने केरल के निवेशक टाइटस बाबू की अपील को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि समाधान योजना के तहत जिन शेयरों को समाप्त किया गया है, उनके अधिकार पुनर्स्थापित नहीं किए जा सकते। क्लीन स्लेट सिद्धांत का तात्पर्य है कि जब किसी कंपनी की दिवाला समाधान प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है और नया समाधान आवेदक कंपनी का नियंत्रण लेता है, तो उसे पुराने प्रबंधन के कर्ज और दावों के बोझ से मुक्त होकर कंपनी का संचालन करने का अवसर मिलना चाहिए।


बाबू का दावा

टाइटस बाबू के पास सिंटेक्स के 1.35 लाख शेयर थे। उन्होंने इन शेयरों के लिए मुआवजा, ब्याज, नए शेयर और हर्जाने की मांग की थी। कंपनी की समाधान योजना के तहत उसकी पुरानी इक्विटी शेयर पूंजी बिना किसी भुगतान के रद्द कर दी गई थी।


कानूनी आधार

एनसीएलएटी ने कहा कि आईबीसी की धारा 238 अन्य कानूनों पर प्राथमिकता रखती है। इसलिए, कंपनी अधिनियम के तहत किसी कार्यवाही के माध्यम से मंजूर समाधान योजना को चुनौती नहीं दी जा सकती। इसके अलावा, आईबीसी की धारा 32 ए 'क्लीन स्लेट सिद्धांत' को और मजबूत करती है। इसके अनुसार, सिंटेक्स की समाधान पूर्व अवधि की देनदारियां मंजूरी के बाद समाप्त हो जाती हैं। न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि एक बार समाधान योजना लागू हो जाने और कंपनी का नियंत्रण नए मालिकों के पास चले जाने के बाद पुराने शेयरधारकों के अधिकार समाप्त हो जाते हैं।


कंपनी का अधिग्रहण

अहमदाबाद एनसीएलटी ने 10 फरवरी, 2023 को सिंटेक्स की समाधान योजना को मंजूरी दी थी। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज और एसेट केयर एंड रिकंस्ट्रक्शन इंटरप्राइज (एसीआरई) के संयुक्त गठजोड़ ने 3,567 करोड़ रुपये में कंपनी का अधिग्रहण किया। एनसीएलएटी ने एस्सार स्टील और घनश्याम मिश्रा मामलों में उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि मंजूर समाधान योजना को दोबारा नहीं खोला जा सकता और योजना में शामिल नहीं किए गए पुराने दावे समाप्त हो जाते हैं।


बाबू की याचिका

टाइटस बाबू ने अक्टूबर 2017 से जनवरी 2023 के बीच एसआईएल के 1.35 लाख शेयर खरीदे थे। इसके बाद उन्होंने कंपनी अधिनियम की धारा 59 के तहत एनसीएलटी का रुख करते हुए कंपनी के सदस्यों के रजिस्टर में सुधार की मांग की। उन्होंने लगभग 82.3 करोड़ रुपये के मुआवजे, 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, रद्द किए गए शेयर के बदले नए इक्विटी शेयर जारी करने और मानसिक पीड़ा के लिए हर्जाने की मांग की।


बाबू का तर्क

उनकी कुल मांग 110 करोड़ रुपये से अधिक थी। बाबू का तर्क था कि कंपनी के एक 'सदस्य' के रूप में उनके अधिकार सामान्य शेयरधारक से भिन्न हैं। उनका कहना था कि समाधान योजना के तहत केवल प्रवर्तक समूह से जुड़े शेयरधारकों के शेयरों को शून्य परिसमापन मूल्य दिया गया था, इसलिए उनके शेयरों को उसी आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता।


याचिका का खारिज होना

हालांकि, एनसीएलटी ने 6 मार्च, 2026 को उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद बाबू ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए एनसीएलएटी का रुख किया।