एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा की संपत्तियों के हस्तांतरण पर रोक लगाई
सुभाष चंद्रा की संपत्तियों पर रोक
दिवाला न्यायाधिकरण एनसीएलटी ने एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा को अपनी संपत्तियों को बेचने या हस्तांतरित करने से रोक दिया है। इसके साथ ही, उन्हें समूह की कंपनियों के कर्ज के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े लगभग 22,006 करोड़ रुपये के दावों का 6.5 करोड़ रुपये में निपटान करने की अनुमति देने वाले आदेश पर भी रोक लगाई गई है। एनसीएलटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने कहा कि पुनर्भुगतान योजना पर स्पष्ट बहुमत नहीं बन पाया है, इसलिए आदेश को लागू नहीं किया जा सकता।
न्यायाधिकरण का निर्णय
पीठ ने स्पष्ट किया कि कंपनी अधिनियम की धारा 419(5) के तहत कोई स्पष्ट मत नहीं है, जिसे लागू किया जा सके। इसलिए तीसरे सदस्य निलेश शर्मा का 25 अगस्त का आदेश स्थगित कर दिया गया है। न्यायाधिकरण ने चंद्रा को निर्देश दिया कि वह किसी भी संपत्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित नहीं करेंगे और सभी पक्षों को नोटिस जारी किए गए। असहमत कर्जदाताओं की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने संपत्तियों के हस्तांतरण पर रोक लगाने का अनुरोध किया था।
कर्जदाताओं की असहमति
असहमत कर्जदाताओं में एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, केनरा बैंक और यूनियन बैंक शामिल हैं। मेहता ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो मामले का मूल आधार समाप्त हो सकता है। न्यायमूर्ति ग्रेवाल ने कहा कि न्यायाधिकरण चंद्रा और पुनर्भुगतान योजना का विरोध करने वाले कर्जदाताओं समेत सभी पक्षों की विस्तार से सुनवाई करेगा।
मामले की अगली सुनवाई
चंद्रा के वकील द्वारा संक्षिप्त दलील रखने का अनुरोध किए जाने पर पीठ ने कहा, 'हम विस्तार से सुनवाई करेंगे।' मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। यह विवाद अब राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) तक पहुंच गया है, जहां असहमत कर्जदाताओं ने पुनर्भुगतान योजना को चुनौती दी है।
चंद्रा की संपत्तियों की जांच
सॉलिसिटर जनरल ने यह तय करने के लिए एक दिन का समय मांगा कि कर्जदाता अपील में आगे बढ़ना चाहते हैं या नहीं। एनसीएलटी का ताजा आदेश चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही को लेकर लंबे समय से चले आ रहे मतभेद के बाद आया है। एनसीएलटी के न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज और तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी वाली दो सदस्यीय पीठ ने सितंबर, 2025 में अलग-अलग फैसले दिए थे।
पुनर्भुगतान योजना का विवाद
भारद्वाज ने पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी थी, जबकि पुरी ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद मामला तीसरे सदस्य निलेश शर्मा के पास भेजा गया, जिन्होंने 25 अगस्त को कुछ विवादित दावों को बाहर रखने और पात्र कर्जदाताओं के बीच उनका हिस्सा फिर से आवंटित करने की शर्त पर पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी थी।
कर्जदाताओं की चिंताएं
दस बैंकों और कर्जदाताओं ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था, जबकि एचडीएफसी बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और केनरा बैंक समेत असहमत कर्जदाताओं ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे होने वाली वसूली बहुत कम होगी। असहमत कर्जदाताओं के पास 20 प्रतिशत से कम मताधिकार था।
चंद्रा का स्पष्टीकरण
चंद्रा ने कहा है कि 22,006 करोड़ रुपये की राशि वह नहीं है, जो उन्होंने व्यक्तिगत रूप से उधार ली थी। इसमें एस्सेल समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए उनके द्वारा दी गई गारंटी से जुड़े दावे शामिल हैं। उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दावों की राशि करीब 3,990 करोड़ रुपये बताई है।
कर्जदाताओं की संपत्तियों की जांच
एनसीएलटी ने पिछले सप्ताह निपटान की अनुमति देते हुए कहा था कि चंद्रा के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया आगे बढ़ाने से कर्जदाताओं को इससे भी कम वसूली हो सकती है। हालांकि, असहमत कर्जदाताओं ने चंद्रा की घोषित कुल संपत्ति की और जांच की मांग की है।
चंद्रा का कारोबारी साम्राज्य
कर्जदाताओं के अनुसार, 2018 में उनकी कुल संपत्ति करीब 40,600 करोड़ रुपये थी, जबकि 2024 तक यह राशि काफी घट गई थी। चंद्रा कभी भारत के प्रमुख कारोबारी चेहरों में शामिल थे। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार खड़ा किया था।
भविष्य की चुनौतियां
चंद्रा का कारोबारी साम्राज्य नकदी संकट के कारण दबाव में आ गया। भारी कर्ज में डूबी एस्सेल समूह की कंपनियों को वित्तीय परिस्थितियों के कारण अपने दायित्वों के पुनर्वित्त में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
