एफएमसीजी कंपनियों के लिए सितंबर तिमाही में मुनाफे पर दबाव की आशंका
कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि का प्रभाव
कच्चे माल और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण देश की रोजमर्रा की उपभोग वस्तुओं का निर्माण करने वाली कंपनियों (एफएमसीजी) के परिचालन मार्जिन पर सितंबर तिमाही में दबाव पड़ने की संभावना है। हालांकि, मांग में स्थिरता और प्रमुख उत्पाद श्रेणियों में वृद्धि के चलते कई कंपनियों के राजस्व में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की उम्मीद है। पैकेजिंग में उपयोग होने वाले कच्चे तेल और उससे बने उत्पादों की कीमतों में तेज वृद्धि के साथ-साथ अन्य वस्तुओं की महंगाई ने कंपनियों की लागत को बढ़ा दिया है। इसके अलावा, कई क्षेत्रों में कम बारिश से कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है.
कंपनियों के प्रदर्शन पर असर
इसका असर कंपनियों के कारोबार और मुनाफे पर पड़ सकता है। एक ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल और उससे जुड़े उत्पादों के साथ अन्य प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि से घरेलू उपयोग और व्यक्तिगत देखभाल उत्पाद बनाने वाली अधिकांश कंपनियों के ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले के मुनाफे (ईबीआईटीडीए) का मार्जिन प्रभावित हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में अधिकांश एफएमसीजी कंपनियों का प्रदर्शन मिला-जुला रहने की संभावना है.
राजस्व वृद्धि की उम्मीद
कई कंपनियों की बिक्री में दोहरे अंक की वृद्धि हो सकती है, लेकिन जिंस की बढ़ती कीमतों के कारण परिचालन मुनाफे की वृद्धि राजस्व वृद्धि से कम रह सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों में कम बारिश कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, जिससे ग्रामीण मांग में नरमी आने की आशंका है। वहीं, खाद्य महंगाई में आगे और वृद्धि होने पर शहरी मांग भी प्रभावित हो सकती है.
प्रमुख कंपनियों के अनुमान
डाबर इंडिया और मैरिको जैसी प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों ने सितंबर तिमाही में अपने राजस्व में दोहरे अंक की वृद्धि का अनुमान जताया है। इन कंपनियों को अपने मुख्य कारोबार और चुनिंदा उत्पाद श्रेणियों में मांग में सुधार से समर्थन मिलने की उम्मीद है। डाबर इंडिया ने अपने तिमाही कारोबारी अनुमान में कहा कि घरेलू एवं व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों (एचपीसी) के साथ बिना चिकित्सक के पर्चे पर मिलने वाली दवाओं और पारंपरिक औषधीय उत्पादों की श्रेणियों में महंगाई का दबाव बना हुआ है.
कंपनियों की लागत और प्रदर्शन
कंपनी के अनुसार, तिमाही के दौरान महंगाई के कारण परिचालन मार्जिन प्रभावित हुआ। हालांकि, कीमतों में चरणबद्ध बढ़ोतरी और लागत बचत के प्रयासों से इस प्रभाव को कुछ हद तक कम करने में मदद मिली। दूसरी ओर, मैरिको ने मार्जिन में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई है। पैराशूट नारियल तेल और सफोला जैसे ब्रांड बनाने वाली इस कंपनी ने कहा कि तिमाही के दौरान कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों की कीमतों में और वृद्धि हुई, जबकि खोपरा की कीमतें अपने उच्चतम स्तर से करीब 35 प्रतिशत नीचे बनी रहीं.
गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का प्रदर्शन
गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (जीसीपीएल) ने भी तिमाही के दौरान कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी की बात स्वीकार की है। कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अंत में कुछ जिंस की कीमतों में नरमी के संकेत मिले थे, लेकिन दूसरी तिमाही में कई प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में फिर तेजी आई। कंपनी के प्रमुख ब्रांड में हिट, गुडनाइट, गोदरेज नंबर-1 और सिंथॉल शामिल हैं.
कुल मिलाकर स्थिति
हालांकि, कंपनी को दूसरी तिमाही में भी मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद है। उसने कहा कि असमान मानसून परिस्थितियों, अल नीनो के मजबूत होने की आशंका और विभिन्न जिंसों की बढ़ती कीमतों से खपत प्रभावित हो रही है। इसके बावजूद पिछले साल की समान अवधि की तुलनात्मक स्थिति अनुकूल रहने से प्रदर्शन को सहारा मिल सकता है. कुल मिलाकर, सितंबर तिमाही में एफएमसीजी कंपनियों के राजस्व में वृद्धि की संभावना बनी हुई है, लेकिन बढ़ती लागत, खाद्य महंगाई और ग्रामीण मांग में संभावित नरमी के कारण उनके मुनाफे की वृद्धि पर दबाव रह सकता है.
