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एफएसएसएआई की कार्रवाई के बाद कंपनियों ने हटाए भ्रामक दावे

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की सख्त कार्रवाई के बाद, कई प्रमुख कंपनियों ने अपने उत्पादों से '100 प्रतिशत' के भ्रामक दावे हटा दिए हैं। इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही जानकारी प्रदान करना है। जानें किस-किस कंपनी ने अपने विज्ञापनों में बदलाव किया और एफएसएसएआई की कार्रवाई का क्या असर पड़ा।
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खाद्य नियामक की सख्ती

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की हालिया कार्रवाई के चलते एमवे इंडिया, इमामी, बॉन बिस्किट्स और अन्य कंपनियों ने अपने उत्पादों की पैकेजिंग, लेबल और विज्ञापनों से '100 प्रतिशत' के भ्रामक दावे हटा दिए हैं। एफएसएसएआई ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि उसने खाद्य कारोबार परिचालकों को '100 प्रतिशत' शब्द का उपयोग बंद करने का निर्देश दिया था। इस नियामकीय हस्तक्षेप के बाद, छह कंपनियों ने अपने उत्पादों और विज्ञापनों से ऐसे दावों को हटाने का निर्णय लिया।


कंपनियों के दावे

एफएसएसएआई ने बताया कि बॉन बिस्किट्स प्राइवेट लिमिटेड ने अपने 'बॉन क्यूमिन फ्लेवर जीरा बाइट बिस्किट्स' के विज्ञापन में '100 प्रतिशत' का दावा किया था, जिसे अब कंपनी ने अपनी वेबसाइट से हटा दिया है। इसी तरह, इमामी लिमिटेड ने अपने 'झंडू शहद' उत्पाद के लिए भी ऐसा दावा किया था, जिसे एफएसएसएआई के परामर्श के बाद हटा दिया गया है।


एपिस इंडिया ने भी अपने शहद उत्पादों से ऐसे दावे हटा लिए हैं। एमवे इंडिया एंटरप्राइजेज ने अपने एक उत्पाद के लिए '100 प्रतिशत शुद्ध नारियल तेल' का दावा किया था, लेकिन अब इस शब्द को पैकेजिंग और प्रचार सामग्री से हटा दिया गया है। इसके साथ ही, केरल की जुजा फूड्स ने भी अपने विभिन्न बेबी फूड उत्पादों से '100 प्रतिशत' दावे हटा दिए हैं।


मास्टरचॉव फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने भी अपने 'रैमेन नूडल' से ऐसा दावा हटा लिया है।


नियामकीय कार्रवाई

एफएसएसएआई ने हाल के महीनों में खाद्य कारोबार संचालकों के खिलाफ कई कानूनी कार्रवाई की है। नियामक ने भ्रामक लेबल, दावों और विज्ञापनों के मामलों में कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं। मंगलवार को, एफएसएसएआई ने कहा कि डाबर इंडिया और फर्न्स एन पेटल्स समेत छह कंपनियों ने नोटिस मिलने के बाद अपनी गलतियों को सुधार लिया है।