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एलआईसी की हिस्सेदारी बिक्री में निवेशकों की भारी भागीदारी

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री को मंगलवार को संस्थागत निवेशकों से अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली, जिसमें 36,400 करोड़ रुपये की बोलियां लगाई गईं। यह बिक्री पेशकश एलआईसी के आईपीओ के चार साल बाद हो रही है। सरकार ने इस ओएफएस के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी को बेचने का निर्णय लिया है, जिससे उसे संभावित रूप से 31,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। खुदरा निवेशकों के लिए भी इस पेशकश में अवसर उपलब्ध हैं। जानें इस बिक्री के पीछे की रणनीति और निवेशकों की प्रतिक्रिया के बारे में।
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एलआईसी की हिस्सेदारी बिक्री पर जोरदार प्रतिक्रिया

नई दिल्ली, 4 अगस्त: भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री को मंगलवार को संस्थागत निवेशकों से अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली। इस बिक्री के लिए निवेशकों ने 36,400 करोड़ रुपये की बोलियां लगाई, जो किसी बिक्री पेशकश के लिए अब तक की सबसे बड़ी बोली है।


सरकार की बिक्री पेशकश का विवरण

सरकार अब एलआईसी में अपनी 6.5 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी को बिक्री पेशकश (ओएफएस) के माध्यम से बेच रही है, जो कि एलआईसी के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के चार साल बाद हो रहा है। यह ओएफएस आकार में आगामी बड़े आईपीओ जैसे एनएसई और रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित निर्गमों के बराबर है। पहले, सरकार ने आईपीओ के तहत 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे।


ओएफएस की संरचना

इस ओएफएस में 2.5 प्रतिशत की आधार पेशकश शामिल है, साथ ही चार प्रतिशत का ‘ग्रीनशू’ विकल्प भी है, जिससे अतिरिक्त बोलियों को शामिल किया जा सके। इस प्रक्रिया के तहत कुल बिक्री का आकार 6.5 प्रतिशत होगा, जिसमें एलआईसी के 82.22 करोड़ शेयर शामिल हैं। मंगलवार को संस्थागत निवेशकों ने 94.45 करोड़ से अधिक शेयरों के लिए बोली लगाई।


बोलियों का मूल्य और सरकार का निर्णय

बोलियों का संकेतात्मक मूल्य 383.84 रुपये प्रति शेयर रहा, जिससे कुल मूल्य लगभग 36,400 करोड़ रुपये बनता है। एलआईसी ने शेयर बाजार को सूचित किया कि सरकार ने अधिक बोली आने पर उसे रखने के विकल्प का उपयोग करने का निर्णय लिया है।


खुदरा निवेशकों के लिए अवसर

इस पेशकश में लगभग 50.60 करोड़ अतिरिक्त इक्विटी शेयर (कंपनी की कुल चुकता इक्विटी शेयर पूंजी का चार प्रतिशत) की बिक्री की जाएगी। एलआईसी ने बताया कि पेशकश का 10 प्रतिशत यानी 8.22 करोड़ शेयर खुदरा निवेशकों के लिए उपलब्ध होंगे, जो बुधवार को बोली लगा सकेंगे। कंपनी ने कहा कि कट-ऑफ कीमत पर बोली लगाने वाले खुदरा निवेशकों और कर्मचारियों को प्रति शेयर 10 रुपये की छूट मिलेगी।


निवेशकों का विश्वास

निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव अरुणीश चावला ने सोशल मीडिया पर लिखा कि एलआईसी ओएफएस के लिए संस्थागत निवेशकों ने इसकी मूल पेशकश के मुकाबले 3.32 गुना अधिक बोली लगाई है। उन्होंने कहा कि यह उत्साहपूर्ण भागीदारी मजबूत निवेशक भरोसे और भारत के पूंजी बाजारों की मजबूती को दर्शाती है।


एलआईसी के शेयरों की स्थिति

एलआईसी का शेयर मंगलवार को बीएसई में 7.86 प्रतिशत गिरकर 391 रुपये पर बंद हुआ, जबकि कंपनी का बाजार पूंजीकरण 4.95 लाख करोड़ रुपये रहा। बिक्री पेशकश के लिए 382 रुपये प्रति शेयर का न्यूनतम मूल्य निर्धारित किया गया है, जो सोमवार के बीएसई के बंद भाव 424.35 रुपये से 10 प्रतिशत कम है।


सरकार को संभावित लाभ

न्यूनतम कीमत पर 82.22 करोड़ से अधिक शेयरों की बिक्री से सरकार को लगभग 31,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। यह हिस्सेदारी बिक्री एलआईसी को बाजार नियामक सेबी की न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता की अनिवार्यता को समय से पहले पूरा करने में मदद करेगी। सेबी ने एलआईसी को 16 मई, 2027 तक न्यूनतम 10 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी हासिल करने का समय दिया है।


सरकार की हिस्सेदारी

फिलहाल, एलआईसी में सरकार की हिस्सेदारी 96.5 प्रतिशत है। पहले, मई 2022 में आईपीओ के माध्यम से एलआईसी की 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची गई थी, जिसमें प्रति शेयर कीमत 902-949 रुपये थी, जिससे लगभग 21,000 करोड़ रुपये जुटाए गए थे।


बोनस शेयर की मंजूरी

एलआईसी के निदेशक मंडल ने अप्रैल 2026 में एक के बदले एक ‘बोनस शेयर’ जारी करने को मंजूरी दी थी। सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक सात सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी बिक्री और भारतीय यूनिट ट्रस्ट के निर्दिष्ट उपक्रम (एसयूयूटीआई) से प्राप्त राशि के जरिये 21,082 करोड़ रुपये जुटाए हैं।