ओएनजीसी को वेनेजुएला में संचालन की मिली मंजूरी, उत्पादन बढ़ाने की योजना
ओएनजीसी को अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद वेनेजुएला में संचालन की मंजूरी मिली है, जिससे कंपनी अपनी तेल परियोजनाओं में तेजी लाने और उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रही है। इस मंजूरी से ओएनजीसी को पहले से अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, जिससे वह नए समझौतों पर बातचीत कर सकेगी। इसके अलावा, कंपनी को लंबे समय से अटके लाभांश की वसूली की भी उम्मीद है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
| Aug 16, 2026, 22:58 IST
ओएनजीसी के लिए वेनेजुएला में नए अवसर
अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते वेनेजुएला में लंबे समय से सीमित गतिविधियों के बाद, ओएनजीसी के लिए वहां काम करना अब आसान हो गया है। सरकारी तेल कंपनी ओएनजीसी की विदेशी शाखा, ओएनजीसी विदेश लिमिटेड, को अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय से वेनेजुएला में संचालन की अनुमति प्राप्त हुई है। इससे कंपनी अपनी मौजूदा तेल परियोजनाओं में तेजी लाने और उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रही है।
नई स्वतंत्रता और संभावनाएं
इस मंजूरी के बाद, ओएनजीसी विदेश को वेनेजुएला में पहले से अधिक स्वतंत्रता प्राप्त होगी। कंपनी उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ नए समझौतों पर भी विचार कर सकती है और कुछ प्रमुख परियोजनाओं का संचालन अपने हाथ में लेने की संभावनाएं तलाश सकती है। इन परियोजनाओं में वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए की महत्वपूर्ण भूमिका है।
ओएनजीसी की रणनीति में बदलाव
ओएनजीसी के वित्त निदेशक अनूपम अग्रवाल ने कहा कि पहले प्रतिबंधों के कारण कंपनी को अपने कार्यों को सीमित रखना पड़ा था, लेकिन अब स्थिति में बदलाव आया है। उनके अनुसार, कंपनी को वेनेजुएला की परियोजनाओं पर काम करने में अधिक स्वतंत्रता मिल गई है और प्रतिबंधों से जुड़े जोखिम अब पहले जैसे नहीं हैं। ओएनजीसी वेनेजुएला सरकार और पीडीवीएसए के साथ नए समझौतों पर बातचीत कर रही है।
लाभांश की वसूली की संभावना
इस मंजूरी का एक महत्वपूर्ण लाभ कंपनी को लंबे समय से अटके लाभांश के रूप में भी मिल सकता है। ओएनजीसी को लगभग 50 से 60 करोड़ डॉलर की राशि मिलने की उम्मीद है, जो प्रतिबंधों के कारण अब तक कंपनी तक नहीं पहुंच पाई थी। परियोजनाओं के वित्तीय संचालन में अधिक स्वतंत्रता मिलने से इस राशि की वसूली का रास्ता भी साफ हो सकता है।
सैन क्रिस्टोबाल परियोजना में हिस्सेदारी
ओएनजीसी विदेश की सैन क्रिस्टोबाल तेल परियोजना में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि काराबोबो-1 परियोजना में कंपनी की 11 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सैन क्रिस्टोबाल में उत्पादन वर्तमान में उसकी क्षमता से काफी कम है। वित्त वर्ष 2025-26 में यहां लगभग 2.65 लाख टन तेल का उत्पादन हुआ था।
उत्पादन बढ़ाने की योजना
ओएनजीसी अब सैन क्रिस्टोबाल में निवेश और संचालन गतिविधियों को बढ़ाकर उत्पादन को मौजूदा 12 से 15 हजार बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर एक साल में 30 हजार बैरल प्रतिदिन तक ले जाने की योजना बना रही है। अनूपम अग्रवाल के अनुसार, वेनेजुएला के उथले तेल क्षेत्र भूगर्भीय रूप से पश्चिमी भारत के मेहसाणा और अहमदाबाद के आसपास के क्षेत्रों से मिलते-जुलते हैं, जिससे ओएनजीसी के तकनीकी अनुभव का वहां उपयोग किया जा सकता है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान
भारत लगातार कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए विभिन्न देशों पर निर्भरता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलती परिस्थितियों के बीच, वेनेजुएला जैसे बड़े तेल उत्पादक देश में ओएनजीसी की सक्रियता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भविष्य में उत्पादन बढ़ने पर भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति का एक अतिरिक्त स्रोत मिल सकता है।
